कोरोनावायरस को लेकर लगे लॉकडाउन से देश के करोड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए है। वर्तमान में अनलॉक होने के बाद भी इन मजदूरों के पास कोई काम नहीं है। विभिन्न मजदूर संगठनों द्वारा सोमवार को श्रमायुक्त कार्यालय में प्रदर्शन कर मजदूरों की समस्याओं के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित किया। कोरोना गाइडलाइन का ध्यान रखकर किए गए इस प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री और मप्र के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया।
श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि हमारी सरकार से मांग है कि श्रम कानूनों में जो भी मजदूर विरोधी संशोधन पिछले दिनों किए गए हैं उन सभी को वापस लिया जाए। प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के बाद उनकी समस्याओं का हल निकाला जाए। इसके साथ ही जो मजदूर वापस अपने काम पर लौटना चाहते हैं उनकी वापसी का प्रबंध भी किया जाए।
इसके साथ ही मजदूर संगठनों ने सरकार से मांग की है कि कोरोनावायरस के मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आशा कार्यकता, आंगनबाड़ी कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया जाए। साथ ही अतिरिक्त कार्य करने पर 10 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान भी किया जाए। इन्हें पीपीई कीट भी उपलब्ध कराई जाए।
मजदूर संगठनों की अन्य मांगे इस प्रकार है
- प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुसार सभी मजदूरों को मुफ्त राशन दिया जाए।
- कोरोना को लेक बंद किए गए सार्वजनिक परिवहन व रेल को जल्द प्रारंभ किया जाए।
- कोरोना प्रभावित प्रत्येक श्रमिक को 7500 रुपए प्रतिमाह का भुगतान सरकार द्वारा किया जाए।
- कर्मचारी भविष्य निधि पेंशन में भगतसिंह कोशियारी कमेटी की सिफारिशें तुरंत लागू किया जाए।
- श्रमिकों के बिजली के बिल, स्कूल-कॉलेज की फीस माफ की जाए।
- श्रमिकों से 12 घंटे काम नहीं लिया जाए।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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