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राजबाड़ा पर आयोजन नहीं, घर पर ही तीज का रतजगा

कोरोना महामारी के चलते शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए हरतालिका तीज पर राजबाड़ा पर महिलाओं की भजन संध्या का होने वाला आयोजन इस बार नहीं होगा। इस पर 19 साल से चली आ रही तीज पर भजन संध्या के आयोजन की परंपरा टूट जाएगी। पिछले साल ही इस भजन संध्या को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार लोग त्योहार मना तो रहे हैं, लेकिन सामूहिक आयोजन नहीं हो पा रहे हैं। इसी कड़ी में लोक संस्कृति मंच द्वारा हर साल हरतालिका तीज पर राजबाड़ा पर आयोजित की जाने वाली महिलाओं की भजन संध्या नहीं होगी।

भगवान शिव और पार्वती के पूजन का रहता विशेष महत्व
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी इस वर्ष 21 अगस्त को हरतालिका तीज मनाई जाएगी। दरअसल, भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व है। हरतालिका तीज व्रत कुमारी और सौभाग्यवती स्त्रियां निराहार और निर्जला करती हैं।

हर त्योहार मनाने का बदल रहा है तरीका
सांसद और लोक संस्कृति मंच के अध्यक्ष शंकर लालवानी और सतीश शर्मा ने बताया कि 2001 से भजन संध्या कराने की शुरुआत की गई थी। सबसे पहले साल लगभग 150 महिलाएं आईं थीं। उसके पहले माता अहिल्या प्रतिमा के पास कुछ महिलाएं ढोलक लेकर बैठतीं और भजन गाकर रतजगा करती थीं। लगातार 19 साल आयोजन कराने के बाद अब इस बार कोरोना संक्रमण के कारण नहीं करवा पाएंगे। ऐसे में महिलाओं को इस बार घर पर ही रहकर भजन और पूजन करना होगा। 2019 में हरतालिका तीज की रात को करीब 15 हजार महिलाओं ने एक साथ भजन संध्या में भाग लेकर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इस आयोजन का नाम दर्ज करवाया था।



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Source From
RACHNA SAROVAR
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