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इंदौर में मिली 100 करोड़ की जमीनें, मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की,पत्नी उषादेवी और बेटे को भी बनाया पक्षकार

(संजय गुप्ता) खासगी ट्रस्ट के मामले में हाई कोर्ट की डबल बेंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता में दो नाम हैं, पहले नंबर पर खासगी ट्रस्ट वाया सतीश मल्होत्रा और दूसरे खुद मल्होत्रा। उन्होंने 13 लोगोें को पक्षकार बनाया है, पर सबसे आश्चर्यजनक नाम उनकी पत्नी व ट्रस्टी उषादेवी और पूर्व ट्रस्टी व बेटे रणजीत मल्होत्रा का है। इसके अलावा ट्रस्ट सचिव एसके राठौर, मप्र सरकार, कलेक्टर इंदौर, मंदसौर व नीमच, इंदौर कमिश्नर व पदेन ट्रस्टी, ट्रस्टी बीजे हीरजी, सुप्रींटेंडेंट इंजीनियर व पदेन ट्रस्टी सहित अन्य लोगों को पक्षकार बनाया है।

जानकारों के अनुसार उषाराजे व अन्य करीबियों को इसलिए पक्षकार बनाया है, ताकि उनके पक्ष में जवाब पेश हो सके।
उधर, सरकार के साथ पाल समाज के विजय पाल ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है। वे हाई कोर्ट में इंटरविनर थे और उत्तराखंड में कुशावर्त घाट बिकने पर सबसे पहले उन्होंने ही याचिका दायर की थी।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद पुराने प्रस्ताव शून्य
यह सवाल भी उठ रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में खासगी ट्रस्ट की ओर से अपील कैसे दायर हो सकती है, जबकि इस संबं‌ध में ट्रस्ट ने कोई प्रस्ताव पास किया ही नहीं है। 2007 में विवादित प्रस्ताव जरूर पास हुआ था कि संपत्ति व वैधानिक मामलों के लिए सतीश मल्होत्रा को अधिकृत किया जाता है, लेकिन यह प्रस्ताव भी हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद शून्य हो जाता है।

वैधानिक रूप से उषाराजे ही हैं उत्तराधिकारी
मूल ट्रस्ट प्रस्ताव को देखें तो वैधानिक रूप से उषादेवी उत्तराधिकारी हैं, यानी वे अपील कर सकती थीं, पर याचिका में उन्हें पक्षकार बना दिया है। फिर एक सवाल ये भी है कि ट्रस्ट की सभी संपत्तियां हाई कोर्ट के आदेश के बाद सरकार की हो गई है तो सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर खर्च होने वाली राशि ट्रस्ट से कैसे जारी हो सकती है। हालांकि इस पर सरकार ने अब तक आपत्ति नहीं ली है।

प्रमुख सचिव 2012 में ही ले चुके केस के खिलाफ आपत्ति
2012 में मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव ने सरकार को जो रिपोर्ट सौंपी थी, उसमें साफ लिखा है कि सरकार के खिलाफ केस दायर करने वाले ट्रस्टियों के खिलाफ इंडियन पब्लिक ट्रस्ट के तहत कार्रवाई होना चाहिए। सरकार के विरुद्ध केस करने की छूट खासगी ट्रस्ट को नहीं मिलना चाहिए।

इंटरविनर बोले- संपत्ति और राशि सरकार की
हरिद्वार के याचिकाकर्ता विजय पाल के वकील आशीष जोशी के मुताबिक, हमने इस मामले में पक्ष रखते हुए कहा था कि कानूनी लड़ाई में ट्रस्ट का पैसा बेवजह खर्च किया जा रहा है, जबकि यह संपत्ति और राशि ट्रस्ट की होकर मप्र सरकार में निहित है।

चार शहरों में सामने आई 406 हेक्टेयर जमीन का कब्जा लेंगे
खासगी ट्रस्ट की संपत्तियों की जांच में इंदौर के साथ ही मंदसौर, खरगोन और नीमच जिलों के 53 गांवों में 406 हेक्टेयर जमीन सामने आई है। हातोद, तिल्लौर खुर्द, केवड़िया, देवगुराड़िया, पिपल्दा और सांवेर में ही 121 हेक्टेयर जमीन ऐसी हैं, जिनकी कीमत 100 करोड़ से अधिक है। नीमच में 86 हेक्टेयर, मंदसौर में 124 हेक्टेयर और खरगोन में भी 73 हेक्टेयर जमीन की जानकारी मिली है। कमिश्नर डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि इन जमीनों पर कब्जे लेने के लिए चारों जिलों के कलेक्टर को पत्र लिख दिया है।

खरीदी-बिक्री में किसे लाभ, जांच करें : ईओडब्ल्यू डीजी
इधर, शनिवार को मामले में आर्थिक अनियमितता की जांच कर रहे ईओडब्ल्यू के आला अफसरों की बैठक हुई। भोपाल से आए डीजी राजीव टंडन ने अफसरों को साफ कह दिया कि किसी तरह की कोताही नहीं बरतें और सभी सौदों की पूरी जांच करें। संपत्ति की खरीदी-बिक्री करने वालों के साथ ही इसका लाभ किसे मिला, जैसे बिंदुओं पर भी जांच हो।



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सतीश मल्होत्रा।


Source From
RACHNA SAROVAR
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