नवजातों की जिंदगी बचाने को कोरोना काल में भी 737 माताअों ने 70230 मिली लीटर दूध का दान किया। सिविल और स्मीमेर अस्पताल के ह्यूमन मिल्क बैंक में इकट्ठा किए गए इस दूध से 909 नवजातों को जिंदगी के साथ कोरोना से लड़ने की शक्ति भी मिली। सबसे अच्छी बात यह है कि 8 हजार मिली. दूध कोरोना पॉजिटिव नवजातों को दिया गया है।
कोरोना के डर से जब लोग घर से बाहर नहीं निकलते थे उस दौरान माताओं ने मिल्क डोनेट करके यह बताया कि ममत्व हर मुसीबत से लड़ने को तैयार है। सिविल और स्मीमेर अस्पताल में आए दिन ऐसे दर्जनों बच्चे पैदा होते हैं जिन्हें मां के दूध की जरूरत पड़ती है। ऐसे बच्चों के लिए ये माताएं नया जीवन देने का काम कर रही है। डॉक्टरों ने बताया कि मां के दूध में वे सभी जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो नवजात के लिए सबसे जरूरी होते हैं।
सिविल में ढाई महीने बंद रहा मदर मिल्क डोनेशन
कोरोना काल के दौरान स्मीमेर अस्पताल में 243 माताओं ने 29 हजार मिली. दूध डोनेट किया। इसे 432 बच्चों को दिया गया। वहीं सिविल अस्पताल में 494 माताओं ने 41230 मिली. दूध डोनेट किया, जिसे 477 बच्चों को दिया गया। कोरोना काल के 7 महीनों में सिविल में करीब ढाई माह तक मिल्क डोनेशन बंद कर दिया गया था। उसके बाद भी माताओं ने बड़ी संख्या में मिल्क डोनेट किया है।
डाॅक्टर: मिल्क डोनेट करने से मां का स्वास्थ्य अच्छा रहता है
सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग के एचओडी डॉ. विजय शाह ने बताया कि हमारी टीम माताअों की काउंसलिंग करती है। इससे जानकारी मिलती है कि किस मां को दूध है और किसे नहीं है। टीम ही बताती है कि किसे मदर मिल्क डोनेट करने की जरूत है या कौन डोनेट करने में सक्षम है। इस बारे में महिलाओं में धीरे-धीरे जागरूकता अा रही है। इससे मां को भी फायदा होता है, वह भी स्वस्थ्य रहती है।
जागरूकता आने से बड़ी मात्रा में हो रहा मदर मिल्क का डोनेशन
सिविल अस्पताल में पिछले साल ही ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू हुआ था। 12 साल पहले 11 दिसंबर 2008 को स्मीमेर अस्पताल में देश का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू हुआ था। शुरुआत के कुछ साल तक मिल्क डोनेशन बहुत मामूली होता था। बाद में धीरे-धीरे कैंप आयोजित कर इस बारे में जागरूकता फैलाई गई। अब काफी मात्रा में मिल्क डोनेट हो रहा है।
डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल में आने वाली कई प्रसूताएं काफी कमजोर होती हैं। वे अपने बच्चों को भी दूध पिलाने की स्थिति में नहीं होती हैं। ऐसे में ह्यूमन मिल्क बैंक से नवजात को मां का दूध उपलब्ध कराया जाता है।
कोरोना पाॅजिटिव कई बच्चों को भी यही मिल्क दिया
सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग की प्रोफेसर डॉ. वैशाली चौधरी ने बताया कि कोरोना के दौरान कुछ माह के लिए मदर मिल्क का डोनेशन बंद कर दिया गया था। इसके बाद भी काफी मात्रा में मिल्क डोनेशन हुआ। कोरोना और संदिग्ध नवजातों को भी यही मिल्क दिया गया। जिन माताओं को मिल्क नहीं आता और उनके बच्चे को मिल्क की जरूरत इस बैंक से पूरी होती है।

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Source From
RACHNA SAROVAR
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