जिले में शासकीय प्राथमिक स्कूल 1438 और मिडिल स्कूल 618, इस प्रकार कुल स्कूल 2056 हैं। इनमें एक लाख 7 हजार विद्यार्थी कक्षा एक से 8वीं तक अध्ययनरत हैं। इन विद्यार्थियाें की पिछले सात माह से लाॅकडाउन के बाद पढ़ाई बाधित है।
शिक्षा विभाग का दावा है कि विद्यार्थियाें काे शाासन द्वारा जारी गाइडलाइन के आधार पर विधिवत पढ़ाई करवाई जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ ओर है। भास्कर ने जिले के अलग अलग तीन गांवाें में जाकर वहां के बच्चाें और अभिभावकाें से बातचीत की और शासकीय स्कूल भवनाें का दाैरा किया, ताे यह स्थिति सामने आई कि कहीं स्कूल भवन में कंडे रखे हुए हैं, ताे कहीं माेहल्ला क्लास ही नहीं लग रही, वहीं कुछ जगहाें पर बच्चाें के पास स्मार्ट फाेन नहीं हाेने से पढ़ाई बाधित हाे रही है।
माेहल्ला क्लास की हकीकत जानने के लिए भास्कर टीम ने तीन गांव का भ्रमण किया ताे चाैंकाने वाली बातें सामने आई। घर के आंगन में बैठकर पढ़ने वाले बच्चे और उनके परिजनाें ने बताया, शिक्षक सप्ताह में चार से पांच दिन पढ़ाने के लिए आते हैं और औपचारिकता पूरी करके चले जाते हैं। पैसे की कमी के चलते स्मार्ट फाेन नहीं हाेने से ऑनलाइन पढ़ाई से भी बच्चे दूर हैं।
टीम सबसे जेतपुरा गांव में पहुंची, जहां शनिवार काे शिक्षक माेहल्ला क्लास में पढ़ाने नहीं अाए। इसके बाद अमरपुरा और गद्दू खेड़ी भी पहुंचे, वहां भी शिक्षक पढ़ाने के लिए नहीं अाए थे। ग्रामीणाें ने बताया, शिक्षक शनिवार काे आते ही नहीं हैं। शासन के आदेश हैं डिजीलेप ग्रुप बनाकर, रेडियो, टेलीविजन और गांव में जाकर माेहल्ला क्लास लगाकर बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं हाे रहा है।
स्कूल के किचन में रखे कंडे
गद्दूखेड़ी में पहुंचे ताे वहां के प्राथमिक विद्यालय के किचन हाल में मवेशी के गाेबर के कंडे रखे हुए थे। ग्रामीणाें ने बताया, प्राथमिक विद्यालय का किचन हाॅल एक साल पहले बनकर तैयार हुअा था। उसमें कभी खाना नहीं बना, ताला खुला था ताे उसमें किसी ने कंडे भरकर रख दिए। हालांकि लोगों ने नाम नहीं बताया, कंडे किसने रखे हैं। छात्र अलफेज तीसरी क्लास, आमिर 5 वी क्लास, असलम चौथी अादि बच्चों के साथ बात कर पढ़ाई की जानकारी ली तो हर बच्चे का जवाब था शिक्षक नहीं आते हमें काैन पढ़ाएगा।
निजी शिक्षक को बुला रहे
कक्षा 6 के छात्र बंटी मालवीय ने बताया, हम स्कूल ही नहीं गए हमारे पास मोबाइल नहीं है और न हमारे घर के आस-पास कोई शिक्षक पढ़ाने आए। रहवासी दिलीपसिंह धाकड़, बाबूलाल पटेल वे बताया, हमने बच्चाें की पढ़ाई के लिए प्रायवेट शिक्षक से बात कर, उन्हे गांव में बुला रहे हैं। सक्षम लाेग हैं वही प्रायवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। सरकारी शिक्षक तो औपचारिकता करने कभी कभी दिख जाते हैं।
चुनाव के बाद निरंतर निरीक्षण करूंगा
चुनाव बाद मैं निरंतर निरीक्षण करूंगा, जाे शिक्षक शिक्षिकाएं लापरवाही करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
-राजीव सूर्यवंशी, डीईओ, देवास
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Source From
RACHNA SAROVAR
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