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ठग इतने शातिर कि शिपिंग कंपनी के जीएम को 1 रुपया भेज 41 हजार और दोस्त से 1.39 लाख ठगे

आप आसानी से ऑनलाइन ठगी का शिकार हो सकते हैं। इस चेतावनी को शायद, आप ज्यादा गंभीरता से न लें। लेकिन यह खबर पढ़कर आप जरूर चौंक जाएंगे। जब आपको पता चलेगा कि अंकलेश्वर में एक प्राइवेट शिपिंग कंपनी का जनरल मैनेजर (जीएम) भी इन शातिर ठगों से बच नहीं पाया। ठग ने अपनी ओर से 1 रुपए का डिजिटल ट्रांजेक्शन कर कई बार सामने से अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर 41 हजार रुपए निकलवा लिए।

इतना ही नहीं इस ठग ने न सिर्फ मैनेजर बल्कि मैनेजर के दोस्त को भी झांसे में ले लिया और बारी-बारी से 1.39 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन करवा लिया। संपर्क साधने का जरिया बनाया एक ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म को। बैंक मैनेजर ने अपना सोफा बेचने के लिए इस प्लेटफार्म पर डाला था। पीड़ित ने अंकलेश्वर में पिछले हफ्ते साइबर क्राइम में मामला दर्ज करवाया था। पुलिस भी सिर्फ ऑनलाइन पेमेंट एप्लीकेशन (वॉलेट) का अकाउंट जान पाई। बैंक खाते का पता अब भी नहीं चल पाया है।


एक्सपर्ट की मानें तो तकनीकी विशेषज्ञता से ज्यादा एक सोशल इंजीनियरिंग का मामला है। ये एक साइकोलॉजिकल गेम है, जिसमें अपना पैसा पाने के लिए ही लोग ठग के जाल में फंसते चले जाते हैं। इसमें स्पूफ एप्लीकेशन की भी मदद ली जाती है। इससे ऑनलाइन रसीद को फर्जी तरीके से बनाकर सामने वाले को भरोसे में लेने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

न ओटीपी पूछा न लिंक पर क्लिक करवाया, बस क्यूआर कोड से स्कैन करवा बातों में उलझा ट्रांजेक्शन करवाता गया

जानिए, ठगी के शिकार जीएम के ही शब्दों में

मैंने सैकंड हैंड सामान खरीदने-बेचने वाले ऑनलाइन प्लेटफार्म पर एक सोफा बेचने के लिए डाला था। फोटो अपलोड होने के बाद एक अनजान नंबर से फोन आया। सामने वाले ने कहा कि 15 हजार में सोफा खरीदना चाहता है। वह ऑनलाइन पेमेंट एप्लीकेशन से पैसे भेजेगा, लेकिन मैंने मना कर दिया।

फिर उसने मुझे ऑनलाइन पेमेंट के लिए कन्वेंस कर लिया। उसने अपना क्यूआर कोड भेजा और मेरे खाते में एक रुपए का ट्रांजेक्शन किया। जो मुझे मिल गया। अब उसे मुझे 14 हजार 999 रुपए और भेजने थे, लेकिन उसने कहा कि बड़ा अमाउंट ट्रांसफर नहीं हो रहा। मैंने पूछा- 1 रुपया आ रहा है तो बाकी भी आ जाएंगे। तब उसने झांसा दिया कि उसके पास स्वाइप मशीन है इसलिए दिक्कत आ रही है।

उसने झांसा दिया कि पहले आप मेरे खाते में 15 हजार रुपए डाल दो, मैं यहां से एक साथ 30 हजार रुपए डाल दूंगा। मुझे लगा कि चलो यह भी कर लेते हैं। मैंने दो बार तीन-तीन हजार रुपए भेजे। इसके बाद भी उसने पैसे नहीं भेजे। फिर उसने मुझे 14500 रुपए और डालने के लिए मना लिया। फउसने 21 हजार रुपए और डालने के लिए कहा तो वो भी डाल दिए।

बार-बार ट्रांजेक्शन से मेरा अकाउंट लॉक हो गया। इसके बाद ठग ने मेरे दोस्त के खाते से ट्रांजेक्शन की सलाह दी। मेरे कहने पर सहकर्मी दोस्त भी ट्रांजेक्शन के लिए तैयार हो गया। दोस्त ने भी बारी-बारी से 1.39 लाख रुपए ठग के खाते में भेज दिए। यानी हम दोनों कुल 1.80 लाख रुपए सामने वाले को भेज चुके थे। तब जाकर मुझे और मेरे दोस्त को ठगे जाने का अहसास हुआ। जब मैंने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने मुझे धमकाते हुए कहा कि मेरे घर पर आकर सोफा भी उठा ले जाएगा और पैसे भी नहीं देगा। कहने लगा जो करना है कर लो।

मैंने बैंक स्टेटमेंट निकाला तो उसमें सारे पैसे एक ऑनलाइन पेमेंट एप्लीकेशन (वॉलेट) में जाता दिखा। जब उस वाॅलेट की पहचान की तो वहां मेरे दोस्त के नाम से फर्जी अकाउंट खोला हुआ था। इतना होने तक ठग वॉलेट से पैसे अपने खाते में डाल चुका था।

जैसा कि जीएम ने पहचान नहीं उजागर करने की शर्त पर भास्कर को बताया

केस 2 कारखाना मालिक से 64 हजार की ठगी

एम्ब्रॉयडरी कारखाना मालिक से 64 हजार की ठगी हो गई। सोशल मीडिया पर एक गाड़ी बेचने के लिए रखी गई थी। कारखानेदार को वह बहुत अच्छी लगी। गाड़ी की कीमत 2.31 लाख रुपए थी। आरोपी ने आर्मी में नौकरी करने की पहचान बताकर कारखाना मालिक से टैक्स आदि के बहाने 64 हजार रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिया।

केस 2 मेडिकल ऑफिसर से 20 हजार रुपए की ठगी

ऑनलाइन पुरानी गाड़ी खरीदने का दूसरा मामला भी सामने आया है। मेडिकल अॉफीसर से स्कूटी खरीदने के बहाने 20 हजार की ठगी हो गई। आरोपी ने स्कूटी का सौदा पक्का करने के बाद डिलीवरी के बहाने दो बार 10-10 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिया। जब गाड़ी नहीं मिली मेडिकल ऑफिसर को ठगी का पता चला। मेडिकल आॅफिसर ने रुपए वापस मांगे तो आरोपी धमकी देने लगा। इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

पुराना मोबाइल खरीदने के चक्कर में अकाउंट के खाते से 3.96 लाख रुपए ट्रांसफर हो गए, पुलिस थाने में केस दर्ज

अकाउंटेंट की नौकरी करने वाले नीरव वोरा से 3.96 लाख रुपए की ठगी हो गई। लसकाणा के एंजेल पैलेस में रहने वाले नीरव ने बताया कि 31 अगस्त को उसे ओएलएक्स नामक एप्लीकेशन पर पुराना मोबाइल दिखाई दिया। वह उसे पसंद आ गया। नीरव ने एप्लीकेशन पर दिए नंबर पर फोन किया।

बातचीत के दौरान मोबाइल का सौदा पक्का हो गया। इसके बाद आरोपी ने कहा कि जीएसटी समेत दूसरे टैक्स भी जमा करने होंगे। नीरव राजी हो गया। इसके बाद टैक्स के बहाने नीरव के अकाउंट से आरोपी ने 3लाख, 96 हजार, 796 रुपए ट्रांसफर करवा लिया। नीरव ने फोन भेजने के लिए कहा तो आरोपी ने धमकी देते हुए फोन बंद कर दिया। नीरव ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। v

एक्सपर्ट व्यूि - चिंतन पाठक, साइबर एक्सपर्ट

अनजान लिंक या क्यूआर कोड स्कैन करने से बचें। डिजिटल लेनदेन अपने विवेक से करें। सामने वाले के कहे अनुसार सब कुछ न करते जाएं। शक होने पर ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड मसलन रिकॉर्डिंग या स्क्रीनशॉट लें। फ्रॉड होने पर 24 घंटे के भीतर पुलिस की मदद लें, जिससे रिफंड की उम्मीद रहती है।



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Thugs are so vicious that sending 1 rupee to GM of shipping company cheated 41 thousand and 1.39 lakh from friend


Source From
RACHNA SAROVAR
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