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एसएनसीयू में भर्ती दाे और नवजातों की रिपोर्ट पाॅजिटिव, तबीयत बिगड़ी तो एक जोधपुर रेफर

बांगड अस्पताल के डॉक्टर्स की लापरवाही के चलते अब एसएनसीयू वार्ड से नवजात शिशुओं के पॉजिटिव आने का सिलसिला शुरू हाे गया है। कुछ दिनाें से पहले यहां जिले के दूसरे अस्पतालों से रैफर हाेकर आए 4 नवजात काेराेना पॉजिटिव आए थे। इसे अस्पताल प्रशासन ने अभी भी गंभीरता से नहीं लिया।

इसके चलते अब 2 और नवजात एसएनसीयू वार्ड से पॉजिटिव आए हैं। जिन्हें शिशु राेग विभाग की ओर से काेविड़ एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया। लेकिन यहां भी एक बच्चे की तबीयत खराब हाे जाने के कारण उसे काेविड एसएनसीयू से जोधपुर भर्ती करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार बांगड़ अस्पताल में कुछ दिनाें पहले दाे महिलाओं की डिलीवरी हुई। इसके बाद दाेनाें बच्चों काे सांस लेने में समस्या हाेने लगी। जिन्हें आनन फानन में एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया। जहां बच्चे का इलाज शुरू हुआ ताे कुछ सुधार आया। लेकिन तीन दिन बाद जब काेविड़ की रिपोर्ट आई जिसमें दाेनाें बच्चे पॉजिटिव पाए गए।

जिन्हें विभाग की ओर से काेविड एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया। लेकिन यहां उपयुक्त तापमान और एसएनसीयू जैसी सुविधा नहीं मिलने के कारण बच्चे एक बच्चे की तबीयत खराब हाे गई। जिसे आनन फानन में जोधपुर रैफर करना पड़ा।

एसएनसीयू वार्ड में पाॅजिटिव आने पर केवल वार्मर हाे रहे सेनेटाइज
अस्पताल में सबसे महत्वपूर्ण वार्ड एसएनसीयू वार्ड और आईसीयू वार्ड काे माना जाता है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन इन वार्ड की ओर ही ध्यान नहीं दे रहा है। अस्पताल प्रशासन ने बाहर से रैफर हाेकर आने वाले बच्चों काे संदिग्ध मानते हुए अस्थाई वार्ड बनाने का निर्णय लिया। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इन बच्चों के संपर्क में आने वाले नर्सिंगकर्मियों की सैंपलिंग करवाने तक का निर्णय नहीं लिया। इसके चलते ये नर्सिंग कर्मी वार्ड में भर्ती दूसरे बच्चों काे संक्रमित कर रहे हैं। इसी के चलते 15 दिन बाद ही दाे और नवजात शिशुओं की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

बच्चाें के इलाज के लिए वार्ड में डॉक्टर तक की सुविधा नहीं
वार्ड में बच्चों के इलाज के लिए शिफ्ट के अनुसार 24 घंटे डॉक्टर की सुविधा हाेनी आवश्यक है, लेकिन वार्ड में न ताे रात काे एक भी डॉक्टर मौजूद रहता है और न ही दिन में। सुबह केवल एक बार डॉक्टर सभी बच्चों काे देखकर जातें हैं, इसके बाद पूरे दिन बच्चे भगवान भरोसे ही पड़े रहते हैं। किसी बच्चे की स्थिति गंभीर हाे जाती है ताे ऑन काॅल बच्चे काे बुलाना पड़ता है। तब तक देर हाे चुकी हाेती है।

  • एसएनसीयू वार्ड में भर्ती बच्चे पॉजिटिव आ रहे हैं। इसके लिए विभाग के एचओडी से बात कर समस्या का समाधान करवाएंगे। स्टाफ में संक्रमित हाेने जैसे लक्षण हाेंगे ताे उनकी भी सैंपलिंग करवाई जाएगी। - डाॅ. केसी अग्रवाल, प्रिंसिपल, मेडिकल काॅलेज पाली


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SNCU recruitment report and newborn's report positive, health deteriorates, then a Jodhpur refer


Source From
RACHNA SAROVAR
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