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हर सूरती अगर फीडबैक देता तो इंदौर को पछाड़ देते, ...फिर भी स्वच्छता में सूरत अव्वल रहा

हर सूरती अगर फीडबैक देता तो इंदौर को पछाड़ देते, ...फिर भी स्वच्छता में सूरत अव्वल रहा। बस हम सर्विस लेवल प्रोसेस (एसएलपी) और सिटीजन फीडबैक में हम इंदौर से मामूली अंतर से पिछड़ गए। इंदौर को अोवरऑल 6000 में से 5647.56 अंक मिले, जबकि सूरत को 5519.59 अंक मिले। इस तरह हम सिर्फ 127.97 अंक से नंबर वन बनने से चूक गए। अगर ये अंक मिल गए होते तो हम चार बार से नंबर वन रहने वाले इंदौर पछाड़ देते। स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के चार पेपर में से सूरत ने दो में इंदौर के बराबर स्कोर किया। सर्टिफिकेशन में सूरत को इंदौर के बराबर 1500 में से 1300 अंक मिले। इसी तरह डायेक्ट ऑब्जर्वेशन में सूरत को 1500 में से 1500 अंक मिले। इतने ही अंक इंदौर को भी मिले।

स्वच्छता सर्वेक्षण में मामूली अंतर से पिछड़ने का कारण हम खुद हैं। सूरती सिटीजन फीडबैक में देने में पीछे रह गए। इंदौर की जनसंख्या 1,964,086 है। सिटीजन फीडबैक में उसे 1083.63 अंक मिले। जबकि स्वच्छता एप डाउनलोड करने के मामले में उसे 332.45 अंक मिले। इस तरह उसे 1500 में से 1416.12 अंक मिले। सूरत की जनसंख्या 4,467,797 है, सिटीजन फीडबैक में हमें 1074.15 अंक ही मिले। इसी तरह स्वच्छता एप डाउनलोड करने के मामले में हमें 295.18 अंक मिले। एसएलपी में हमें 1171.27 अंक मिले और फाइनल लीग में 179 अंक मिले। इंदौर को एसएलपी में 1231.44 अंक मिले, जबकि फाइनल लीग में 200 अंक मिले। सूरत को गार्बेज फ्री स्टार रेटिंग में फाइव स्टार और ओडीएफ प्लस-प्लस का प्रमाण पत्र भी मिला। ओडीएफ प्लस प्लस फाई स्टार रेटिंग के लिए 1300 अंक मिले।

ये रही हमारी ताकत

ट्रीटमेंट प्लांट: सालाना 60 करोड़ की आय

शहर के पांडेसरा में बने टर्सरी ट्रीटमेंट प्लांट से गंदे पानी को शुद्ध कर इंडस्ट्रीज को सप्लाई कर मनपा के सालाना 60 करोड़ की आय करती है। वर्ष 2014 में 85 करोड़ के खर्च से ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया था। इससे प्रतिदिन 40 एमएलडी पानी सप्लाई किया जाता है। वर्ष 2020 के शुरू में ही 35 एमएलडी का 100 करोड़ के खर्च से प्लांट बनाया गया। हालांकि अभी 35 एमएलडी पानी की सप्लाई शुरू नहीं की गई है।

खजोद: ऐसा मैदान कि गोल्फ खेला जा सके

खजोद में सॉलिड वेस्ट कंपोजिट प्लांट बनाया गया था। शहर का कचरा वहीं डंप किया जाता था। इससे वहां बार-बार वहां आग लग जाती थी। 2016 में कचरे के निकाल का रूल बनने से खजोद डिस्पोजल प्लांट के 6 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में से 3 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र को कचरे को डालकर, लाइनिंग कर उस पर मिट्टी डालकर 50 करोड़ रुपए के खर्च से ऐसा ग्राउंड बनाया इस पर गोल्फ खेला जा सकता है। इसे 18 माह में बनाया गया।

वेस्ट टू कंपोज प्लांट: कचरे से खाद बना रहे

खजोद डिस्पोजल में ही शहर के करीब 1700 टन कचरे को ट्रीट कर खाद बनाई जा रही है। जो कॉन्ट्रेक्टर द्वारा कृभको को दिया जाता है। कृभको कुल खाद का 40 फीसदी डिस्पोजल प्लांट से ही खरीदता है। इससे मनपा को कोई आय नहीं होती, लेकिन प्रतिदिन खजोद जाने वाले 1700 टन कचरे का निकाल हो जाता है।



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खजोद डिस्पोजल साइट पर कभी कचरे के पहाड़ हुआ करते थे। तब यह हमारे लिए सबसे बड़ा माइनस प्वॉइंट था। इसकी वजह से हम स्वच्छता सर्वेक्षण में हमेशा पीछे रह जाते थे। हमने इस समस्या का समाधान कर दिया।


Source From
RACHNA SAROVAR
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