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भूमि सुधार अधिनियम में संशोधन, शैक्षणिक उद्देश्य से जमीन खरीदने को कलेक्टर की मजूंरी जरूरी नहीं

गुजरात में अब कृषि-पशुपालन यूनिवर्सिटी या शैक्षणिक उद्देश्य से जमीन खरीदने के लिए जिला कलेक्टर की मंजूरी नहीं लेनी होगी। गुरुवार को सरकार ने भूमि सुधार अधिनियम में सुधार की घोषणा की। जिसके तहत शैक्षणिक प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया सरल कर दी गई है। उद्योगों के लिए खरीदी गई जमीन को अब दूसरे प्रोजेक्ट के लिए आसानी से बेच सकेंगे।

सरकार के नियमानुसार शैक्षणिक प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने के एक महीने के भीतर कलेक्टर को जानकारी देकर बोनाफाइड इंडस्ट्रियल पर्पज की तरह आवश्यक प्रमाण-पत्र हासिल करके निर्धारित समय में काम शुरू कर सकेंगे। अब तक जमीन खरीदने के लिए गैरकृषि संस्था या व्यक्तियों को कलेक्टर से मंजूरी लेनी पड़ती थी। इस वजह से लंबे समय तक टाइटल क्लीयरंस, इंस्पेक्शन आदि प्रक्रिया में काफी समय बर्बाद होता था। राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में औद्योगिक क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए भूमि सुधार अधिनियम में सुधार करने का निर्णय लिया है।

जमीन खाली होगी, विकास के काम होंगे, पर सावधानी जरूरी

शैक्षणिक संस्थान सीधे खेती की जमीन खरीदने के बाद गैरकृषि का प्रमाण-पत्र ले सकेंगे। सरकार इस सुधार से शिक्षा को उद्योग का दर्जा देने जा रही है। पहले बोनाफाइड उद्योग के लिए नियम बनाया था कि इज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत जमीन खरीदने और प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद इसकी जांच होती थी। इसके बाद उद्योग विभाग कलेक्टर को गैरकृषि एवं अन्य सर्टिफिकेट के लिए अर्जी देता था। उद्योगों की तरह ही शिक्षा संस्थानों को भी सुविधा दी गई है। शैक्षणिक संस्थानों काे गौशाला या अन्य सरकारी जमीन जो जंत्री के 50 प्रतिशत हिसाब से लीज पर दी जाती थी मुनाफा कमाने के लिए उसकी बिक्री न हो सरकार को इसका ध्यान रखना होगा। दूसरे बोनाफाइड इंडस्ट्रीज के तहत दी गई जमीन का उपयोग उद्योग के लिए न हो रहा हो तो उसे जीडीसीआर के अनुसार अन्य प्राेजेक्ट के लिए बेचा जा सकता है। मौजूदा समय में कोरोना या दिवालिया होने की वजह से अधिकांश उद्योग बंद हो रहे हैं। ऐसी जमीनें खाली होंगी और वहां विकास के काम हो सकेंगे। इसे अार्थिक स्थिति मजबूत हाेगी। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार को इसका ध्यान रखना होगा कि हर व्यक्ति सच्चा नहीं होता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उद्योग जंत्री के हिसाब से रकम भरकर उसे बेच सकेंगे।



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Source From
RACHNA SAROVAR
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