मंगलवार को जान गंवाने वाले कोरोना संदिग्ध नारायण सिंह राठौर निवासी नया बाजार का अंतिम संस्कार करीब छह घंटे देरी से हो सका। परिजनों का आरोप है कि नगर निगम का स्टाफ ट्राॅली पर शव को रखने के एवज में 4 हजार रुपए मांग रहा था। जबकि इसके लिए शासन से 5 हजार रुपए की राशि मिलती है।
परिजनों की शिकायत दूसरे माध्यम से निगम आयुक्त संदीप माकिन के पास पहुंची तो उन्होंने उपायुक्त डाॅ.अतिबल सिंह यादव को मौके पर भेजकर अंतिम संस्कार कराने को कहा। इसके बाद रात करीब 9 बजे श्री राठौर का अंतिम संस्कार हो पाया। गौरतलब है कि कोरोना पीड़ित मरीज की मौत के बाद अंतिम संस्कार लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के विद्युत शवदाहगृह में नि:शुल्क किया जाता है, लेकिन कुछ दिन से यहां काम करने वाले कुछ लाेग मृतकाें के परिजन से पैसा मांगने लगे हैं।
एक दिन पहले अस्पताल में भर्ती हुए थे राठौर
नारायण सिंह राठाैर काे सोमवार को कोरोना के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुबह 6 बजे सैंपल लिया गया। रिपोर्ट आने से पहले श्री राठाैर की माैत हाे गई। डाॅक्टरों ने उन्हें कोरोना संदिग्ध माना। परिजनों का कहना है कि अस्पताल ने शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं दी। मुक्तिधाम में खुद को सुपरवाइजर बताने वाले नरेंद्र और उनके साथी 4 हजार रुपए मांग रहे थे। इस वजह से रात 9 बजे अंतिम संस्कार हो पाया।
कोई पैसा नहीं लिया जाता
कोरोना से मौत के बाद मरीज का लक्ष्मीगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया जाता है। वहां किसी से भी कोई पैसा नहीं लिया जाता। मैं उपायुक्त अतिबल सिंह को बोलता हूं कि वह जांच करे कि किसने पैसे मांगे और क्यों। -संदीप माकिन, आयुक्त निनि
दूसरे लोग मांग रहे थे पैसे
मामले में मैंने पता किया था। मृतक के परिजन बाहर के लोग बुलाकर लाए थे। वे पैसा मांग रहे थे। निगम का कोई स्टाफ पैसा नहीं मांग रहा था। मैंने मौके पर पहुंचकर अंतिम संस्कार कराया है। -डाॅ. अतिबल सिंह यादव, उपायुक्त नगर निगम
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Source From
RACHNA SAROVAR
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