कोरोना काल में स्कूल बंद हाेने के कारण बच्चों को पढ़ाने के लिए नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। बाबा साहब यूथ फोरम ने सेवा भारती की प्रेरणा से मोहल्ला पाठशाला शुरु की। इसके 20 सदस्य का दल 11 मोहल्ला पाठशाला लगाकर 11 आदिवासी फलियों के 200 बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ये सदस्यों बच्चों को कक्षावार छोटे-छोटे समूहों में बांटकर पढ़ाई करा रहे हैं। ताकि कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। मोहल्ला पाठशाला से प्राथमिक व मिडिल स्कूल के बच्चों को लाभ मिल रहा है। क्षेत्र के हर गांव के अलग-अलग फालियों में बच्चों की उपलब्धता के आधार पर फोरम के सदस्य कक्षाएं लगा रहे हैं। सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए बच्चों को बैठाकर पढ़ाई करा रहे हैं।
सेवा भारती के जिला सेवा प्रमुख फूलचंद मसकोले ने बताया ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों के पास एंड्रायड मोबाइल और नेटवर्क की दिक्कत के कारण अधिकतर बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं से नहीं जुड़ पा रहे थे। इसे देखते हुए बाबा साहब यूथ फोरम के कार्यकर्ताओं ने पाठशाला की शुरुआत की। लेकिन यह आसान नहीं था। पहले परिवारों ने बच्चों को उनके माता पिता ने पढ़ाने से मना कर दिया, कहा कि कोरोना काल के चलते लंबे समय से स्कूल बंद पड़े है, फिर हम कैसे भेजे। लेकिन काफी समझाइश के बाद बच्चों के पालक राजी हुए। अब फोरम के 15 से 20 सदस्य जो स्वयं सेवा देकर करीब 2 माह से मोहल्ला पाठशाला में बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
इन गांवों में स्वयं के खर्च से जुटाई व्यवस्थाएं
युवा अपने समय के अनुसार बच्चों को पढ़ा रहे हैं। यह पाठशाला करीब 2 महीने से चल रही है। युवा कार्यकर्ता भीलखेड़ी, चिल्या टांडा, खोदरी टांडा, सायमाल टांडा, डेहरिया, सराय के पास बेड़ी टांडा, दीनदयाल नगर गांधवा में सेवा बस्तियों में मोहल्ला पाठशाला चल रही है। कार्यकर्ताओं ने बच्चों को स्वयं के खर्चे से पोर्टेबल ब्लेक बोर्ड और चाक से पढ़ाते हैं। पुस्तकें भी खरीद कर दी है। शुरुआत में पहले 4 से 5 बच्चे आते थे, अब 1 पाठशाला में लगभग 12 से 15 बच्चे आते हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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