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पर्सनल आईडी से ट्रेन के टिकट बनाते 2 ई-मित्र संचालक गिरफ्तार, 935 टिकटों का रिकॉर्ड जब्त

ई-मित्र सेंटर की आड़ में रेलवे के अवैध रुप से ई-टिकटाें की दलाली करते कस्बे के सुभाष चाैक स्थित दाे सेंटर संचालक मंगल कम्युनिकेशन के उमेश चंद गुप्ता तथा गर्ग ई-मित्र सेंटर के गिरीश गर्ग काे आरपीएफ ने गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार ई-मित्र संचालकाें से टीम ने लाइव टिकिट, कंप्यूटर सिस्टम, लैपटाॅप, प्रिंटर, डाेंगल, मोबाइल आदि जब्त किए है। दाेनाें ई-टिकट दलालाें से आरपीएफ ने ऐसे 935 ई-टिकटाें का 12.65 लाख का रिकार्ड जब्त किया है।


रेलवे सुरक्षा बल की अपराध शाखा काेटा से आई विशेष टीम ने स्थानीय आरपीए के साथ मिलकर इस कार्रवाई काे अंजाम दिया। आरपीएफ ने रविवार काे दाेनाें गिरफ्तार आराेपियाें काे भरतपुर में रेलवे के अवकाशकालीन लिंक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। जहां से दाेनाें काे 20 अक्टूबर तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए।

काेटा से आई टीम में एसआई धर्मेन्द्र कुमावत व दिलखुश मीणा सहित अन्य आरपीएफ कर्मी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि आरपीएफ ने पूर्व में भी जिले के विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई कर पर्सनल आईडी से टिकट बनाने के मामले पकड़े थे।

त्योहारी सीजन में एक टिकट से कमाते थे 500 से 700 रुपए
आरपीएफ इंचार्ज मुकेश चौधरी ने बताया कि ई टिकट की दलाली के मामले में पकड़े गए दोनों ई मित्र संचालक आईआरटीसी के अधिकृत एजेंट तो हैं। गिरफ्तार आरोपी रेलवे के तत्काल आरक्षण के लिए अपनी एजेंटशिप के बजाए पर्सनल यूजर आईडी के जरिए टिकटों की बुकिंग करते थे। क्योंकि आईआरटीसी के जो अधिकृत एजेंट हैं उनकी साइट आधा घंटे बाद खुलती है। लेकिन इसी बीच में सभी सीटें फुल हो जाने के कारण एजेंटशिप की आईडी से टिकट बुक नहीं हो पाती।

इसके लिए इन्होंने एक साथ कई पर्सनल यूजर आईडी बनाई हुई है। इस तरह दोनों ई मित्र संचालक गलत तरीके से पर्सनल यूजर आईडी का उपयोग अपने व्यापार के रूप में कर रहे थे। त्योहारी सीजन में तो एक टिकट पर इनको 500 से 700 रुपये तक ग्राहक से अतिरिक्त मिल जाते हैं। जबकि आम दिनों में एक टिकट पर 100 से लेकर 300 तक का फायदा लेते हैं।

कम्प्यूटर, माेबाइल, लैपटाॅप व प्रिंटर जब्त, दोनों संचालक आईआरसीटीसी के एजेंट भी हैं, काफी समय से इस गोरखधंधे में लिप्त थे, अब पकड़े गए

आरपीएफ बयाना चौकी इंचार्ज मुकेश चौधरी ने बताया कि आरपीएफ की अपराध शाखा अवैध रुप से ई-टिकट बेचकर रेलवे के राजस्व काे नुकसान पहुंचाने वाले लाेगाें के खिलाफ विशेष अभियान चला कर अंकुश लगा रहा है। जिसके तहत रेलवे के प्रबल सॉफ्टवेयर के माध्यम से रेलवे ई-टिकट के लिए उपयाेग में ली जा रही यूजर आईडी काे खंगाला जा रहा है।

माॅनीटरिंग में गडबडी की आशंका पर अपराध शाखा काेटा की टीम आईपीएफ राजीव खर्ब के नेतृत्व में बयाना पहुंची तथा बाेगस ग्राहक बनकर ई-मित्र सेंटराें पर जानकारी की। जानकारी के दाैरान ई-टिकट बेचने की गडबडी मिलने पर सुभाष चाैक स्थित मंगल कम्युनिकेशन व गर्ग ई-मित्र सेंटर पर छापामार कार्रवाई कर ई-टिकट बेचने के काराेबार का भंडाफाेड़ किया।

टीम ने दाेनाें सेंटराें के संचालकाें उमेश व गिरीश काे हिरासत में लेकर पूछताछ करने के साथ उनके कम्प्यूटर सिस्टम, माेबाइलाें का रिकार्ड खंगाला। जांच में 935 ई-टिकटों का 12.65 लाख का हिसाब-किताब मिलने पर दाेनाें संचालकाें काे गिरफ्तार किया गया। आरपीएफ ने दोनों के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत केस दर्ज कर दोनों आरोपियों को अग्रिम कार्रवाई के लिए बयाना आरपीएफ पाेस्ट को सौंप दिया।

आरोपियों ने 7 पर्सनल आईडी बना रखी थीं
आरपीएफ इंचार्ज ने बताया कि गिरफ्तार आराेपी आईआरटीसी से वैध लाइसेंस के बजाय 7 पर्सनल आईडी से ई-टिकट बनाने का गाेरखधंधा कर रहे थे। कार्रवाई के दाैरान एक लाइव टिकट भी मिला है जाे उदयपुर से निजामुद्दीन नाॅन एसी सैकंड क्लास का 765 रुपए का था। जानकारी मिली है कि ई-टिकट बनाने की एवज मेें संचालक ग्राहकाें से निर्धारित किराए के अलावा माेटा कमीशन ऐंठते हैं।



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2 E-Mitra operators making train tickets with personal ID arrested, record of 935 tickets seized


Source From
RACHNA SAROVAR
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