कोरोना काल में पहली बार सामान्य सभा की बैठक बुलाई गई। मनपा चुनाव के पहले होने वाली इस सामान्य सभा में कांग्रेस ने अपना भविष्य तलाशा, जबकि भाजपा सीमांकन का दांव चलने के बाद से ही निश्चिंत नजर आ रही है। मनपा चुनाव की घोषणा अब कभी भी हो सकती है।
शनिवार शाम 4 बजे पाल स्थित संजीवकुमार ऑडिटोरियम में शुरू हुई सामान्य सभा में भाजपा के 32, कांग्रेस के 18 सहित कुल 50 पार्षद मौजूद थे। इसके भाजपा के 48 और कांग्रेस के 18 सहित 66 पार्षद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सभा में शामिल हुए। वैसे ही सीमांकन के कारण कांग्रेस की स्थिति बुरी है।
ऐसे में चुनाव पूर्व कांग्रेस लोगों की समस्या और लोगों की आवश्यकता के मुद्दों को लेकर हंगामा, प्रदर्शन और धरना देने का काम कर रही है। सामान्य सभा में भी कांग्रेस ने खाड़ियों में आई बाढ़ से लोगों को हुई समस्या, बारिश से खराब हुई सड़कें और कोरोना से लोगों के इलाज को लेकर जमकर हंगामा किया। भाजपा के ही एक पार्षद प्रवीण पटेल ने पाल-उमरा ब्रिज का निर्माण जल्द से जल्द कराने की मांग की।
पिछले तीन दिन से सॉइल टेस्टिंग का काम शुरू हुआ है, लेकिन प्रभावितों ने अभी तक मकानों का कब्जा मनपा को नहीं सौंपा है। अधिग्रहण का काम नहीं हो पाने से ब्रिज का काम शुरू होने में देरी होगा। काम जल्द शुरू कराया जाए।
खाड़ी में बाढ़ से बचने को दीवार का काम पूरा किया जाए
सामान्य सभा के जीरो ऑवर्स में हिम्मत बेलडीया ने कहा कि मेरे वार्ड क्षेत्र में अगस्त में 40 इंच बारिश के कारण मीठी खाड़ी में 3 से 4 बार बाढ़ आई। इससे डेढ़ से दो लाख लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। वराछा-वालक खाड़ी को डायवर्ट करने की बात सच से परे लगती है। बारडोली और उसके आसपास भारी बारिश ने खाड़ी में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी। खाड़ी के दोनों किनारों पर सुरक्षा दीवार के शेष कार्य को योजनाबद्ध किया जाना चाहिए।
लोग 18 दिन तक पानी में रहे, जुर्माना वसूलना चाहिए
कांग्रेस के असलम सायकलवाला ने आरोप लगाया कि खाड़ी में आई बाढ़ प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित थी। तापी शुद्धिकरण के लिए लाइन डायवर्ट करने से सारोली, सणिया हेमाद, पूणा कुंभरिया के खेतों में पानी भरने से 1500 एकड़ खेती नष्ट हो गई। इलाके के स्थानीय निवासी खुद इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। ठेकेदार से जुर्माना वसूलना चाहिए। लोग 18 दिनों तक पानी में रहे।
कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ों पर उठाया सवाल
विपक्ष के नेता प्रफुल्ल तोगड़िया ने सवाल उठाते हुए कहा कि कब्रिस्तान और नगरपालिका में मौत का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। एकता ट्रस्ट का कहना है कि यह रोजाना 50 शवों का अंतिम संस्कार करते हैं, जबकि नगरपालिका 17 से 18 लोगों की मौत बताती है। अगर लोगों को घर से निकाल दिया जाता है, तो वे कहते हैं कि यह कोविड है और यदि वे मर जाते हैं, तो वे कहते हैं कि यह कोविड नहीं है।
31 अक्टूबर के बाद सड़क पर एक भी गड्ढे नहीं दिखेंगेे:
विपक्ष ने शहर में टूटी सड़कों का मुद्दा उठाया था। जिसमें विपक्ष ने आरोप लगाया कि निगम कोविड-कोविड में अन्य कार्यों को भूल गया है। जिसके कारण नागरिकों को खाड़ी बाढ़ के साथ अन्य बीमारियों जैसे डेंगू, मलेरिया का सामना करना पड़ा।
कतारगाम में निर्माणाधीन पुल के नीचे गड्ढे हैं। सड़क के मुद्दे पर आयुक्त ने कहा कि भारी बारिश से शहर में 176 किमी सड़क क्षतिग्रस्त हो गईं। जिसमें से 154 किलोमीटर सड़क का काम पूरा हो चुका है। शहर में 31 अक्टूबर के बाद सड़क पर एक भी गड्ढे नहीं दिखेंगे।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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