विजय नगर के दो माॅल को पिछले वर्षों के मुकाबले पांच गुना ज्यादा राशि के संपत्तिकर बिल थमाए जाने को जिला एवं सत्र न्यायालय ने गलत माना। कोर्ट ने नगर निगम के नोटिस को निरस्त करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष खत्म होने के छह महीने पहले महापौर परिषद को इस संबंध में प्रस्ताव पारित करना चाहिए। फिर इस प्रस्ताव की सूचना दो अखबारों में प्रकाशित कराना चाहिए थी। जनता से इस पर दावे, आपत्ति मंगाने के बाद कोई निर्णय पारित करना चाहिए था।
माॅल प्रबंधन की ओर से अधिवक्ता विजय आसुदानी ने याचिका लगाई थी। एक माॅल को पहले डेढ़ करोड़ तो दूसरे को 88 लाख रुपए का प्रॉपर्टी टैक्स भरने का नोटिस दिया गया था। प्रबंधन ने इतने टैक्स की जानकारी ली तो पता चला कि दोनों माॅल की पार्किंग एरिया को भी संपत्ति का हिस्सा मानकर उसका भी टैक्स जमा करने को कहा गया था। वहीं निगम की ओर से कहा गया कि टैक्स की गणना नियमानुसार की गई। सभी जगह इसी तरह वसूली हो रही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निगम की कार्रवाई को गलत ठहराया। पांच गुना टैक्स वसूली के नोटिस को निरस्त कर दिया।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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