मंडी टैक्स को कम किए जाने के बाद लगभग 12 दिन से चली आ रही छावनी और लक्ष्मी बाई नगर अनाज मंडी के व्यापारियों की हड़ताल खत्म हो गई। अब गुरुवार से दोनों मंडियों में कामकाज शुरू हो जाएगा। इधर, तीनों मंडियों के व्यापारियों की रोजाना की औसतन 36 लाख रुपए की आय बढ़ जाएगी, जो कि अभी तक मंडी टैक्स के रूप में चली जाती थी। वहीं इतनी ही राशि की कटौती अब मंडी की आय में होगी।
इंदौर अनाज तिलहन व्यापारी संघ के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश सरकार ने नया मंडी एक्ट लागू कर दिया है। इससे अब मंडियां खत्म हो जाएंगी। इसके विरोध में मंडी के कर्मचारी हड़ताल कर रहे थे। वहीं मंडियों के खत्म होने से किसानों के साथ व्यापारियों को भी लाखों रुपए का फायदा था, लेकिन किसानों के साथ ठगी व अन्य आपराधिक घटनाएं बढ़ सकती हैं। इसके विरोध स्वरूप व्यापारियों ने सरकार से मांग की थी कि वे मंडी एक्ट लागू करने के बजाय मंडी टैक्स को 1.70 रुपए से घटाकर 50 पैसे कर दें। इससे मंडी की आय बंद नहीं होगी और किसानों को भी उपज बेचने के लिए प्लेटफॉर्म मिलता रहेगा।
यह है शहर की तीनों मंडियों की आय का गणित
- छावनी अनाज मंडी में अच्छी आवक होने की स्थिति में प्रतिदिन करीब 20 हजार बोरी की आवक होती है। इससे करीब 20 करोड़ रुपए का प्रतिदिन कारोबार होता है। इस पर लगभग 34 लाख रुपए रोजाना तो टैक्स ही लग जाता था, जो कि अब घटकर 10 लाख रुपए प्रतिदिन रह जाएगा।
- लक्ष्मी बाई नगर अनाज मंडी व्यापारी एसोसिएशन के सचिव प्रवीण गर्ग के मुताबिक रोज औसतन 10 से 12 हजार बोरी की आवक रहती है। इससे 4 करोड़ रुपए रोज का कारोबार होता है। मंडी को टैक्स के रूप में 6 लाख रुपए के करीब भुगतान होता था। अब यह 2 लाख रुपए प्रतिदिन के करीब रह जाएगा।
- चोइथराम मंडी में सभी उपज के 70 हजार कट्टे प्रतिदिन की आवक होती है। इनका कारोबार प्रतिदिन का लगभग 8 करोड़ रुपए का होता है। इसके एवज में 12 लाख रुपए तो टैक्स में ही चले जाते थे जो कि अब 4 लाख रुपए प्रतिदिन हो जाएंगे।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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