हेल्थ रिपोर्टर | सूरत
शहर के तीन सरकारी अस्पतालों में पिछले साल की अपेक्षा अोपीडी 90 फीसदी तक कम हो गई है। सीजनल बीमारियों के साथ अन्य बीमारियों से लोग पीड़ित तो हो रहे हैं, लेकिन कोरोना के डर से अस्पताल नहीं जा रहे हैं। कुछ लोग घर पर खुद ही इलाज कर रहे हैं तो कुछ अासपास के क्लीनिक से इलाज करवा ले रहे हैं। लोगों को डर है कि सरकारी अस्पतालों में जाएंगे तो कोरोना का टेस्ट कराना पड़ेगा। और अगर पाॅजिटिव अा गए तो कुछ दिन घर पर ही रहना पड़ेगा। पिछले साल अक्तूबर में सिविल-स्मीमेर और मस्कती अस्पताल में हर दिन विभिन्न बीमारियों व एक्सीडेंट के 7 हजार से अधिक मरीज आते थे। इस साल इन तीनों अस्पतालों में रोज महज 700 मरीज ही आ रहे हैं। इन अस्पतालों में महज 10 फीसदी ही मरीज आ रहे हैं। विभिन्न बीमारियों के साथ कोरोना के भी मामले अस्पतालों में लगातार कम आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अाशंका थी कि कोरोना से बने हालात सामान्य होने के बाद अस्पतालों में अन्य बीमारियों के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाएगी, लेकिन एेसा नहीं हो रहा है। हालांकि शहर के अाठों जोन में मलेरिया और डेंगू के केस अा रहे हैं, लेकिन मनपा का कहना है कि ये पिछले साल से कम हैं। वर्ष 2019 के अक्टूबर में सिविल अस्पताल में हर दिन 4 हजार से अधिक मरीज आते थे। अब महज 150 से 200 मरीज ही आ रहे। वहीं स्मीमेर अस्पताल में पिछले साल 2500 से अधिक मरीज आते थे अब 400 से 500 ही आ रहे। मस्कती अस्पताल में इसी महीने में 500 से अधिक आते थे, लेकिन अब 40 से 50 मरीज ही आ रहे हैं।

कोरोना से डर कर अस्पताल नहीं आ रहे मरीज: डॉक्टर
सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि मरीजों की संख्या बहुत ही कम हो गई है। पहले मरीजों की संख्या अधिक होती थी। गंभीर हालत में आते थे। लोग स्वास्थ्य को लेकर सजग हैं। मामूली समस्या पर भी समय से इलाज ले रहे हैं। खान-पान, रहन-सहन, साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। घरेलू उपचार कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात सरकारी अस्पतालों में लोग कोरोना के डर से नहीं आ रहे हैं।
पहले हर दिन बिना इलाज के लौट जाते थे सैकड़ों मरीज
कोरोना के पहले सिविल अस्पताल में इतनी भीड़ होती थी कि एक डॉक्टर पर करीब 250 से अधिक मरीजों का भार था। ऐसे में डॉक्टर 30 से 60 सेकंड ही एक मरीज को दे पाते थे। उसके बाद भी दिन के दोनों टाइम की ओपीडी में सैकड़ों मरीज बिना इलाज ही घर लाैट जाते थे। केस पेपर लेने में 3 से 4 घंटे का समय लगता था। नंबर पाने के लिए मरीज सुबह 6 बजे से ही लाइन में लगे रहते थे।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे लोग, सावधानी बरतने लगे हैंकोरोना के कारण लोगों ने स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की एक्टिविटी शुरू कर दी है। लोगों स्वास्थ्य के प्रति सतर्क हैं। जागरूकता बढ़ने और प्रदूषण पर नियंत्रण के कारण मरीजों की संख्या कम हुई है।-डॉ. जयसुख वागडिया, स्वास्थ्य अधिकारी, मनपा
सीजनल बीमारियों के मरीज भी कम आ रहे
मनपा का कहना है कि पिछले साल अक्टूबर में डेंगू के 200 मामले आए थे, लेकिन इस बार 29 अक्टूबर तक 47 मामले ही आए हैं। वहीं मलेरिया के पिछले साल अक्टूबर में 600 मामले थे, लेकिन इस बार अब तक 48 केस ही आए हैं।
पिछले साल अकेले सिविल अस्पताल में इसी माह रोज डेंगू-मलेरिया के संदिग्ध और सीजनल बीमारियों के 1000 मरीज आते थे। इस बार मेडिसिन ओपीडी में 40 से 50 मरीज ही आ रहे हैं।

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Source From
RACHNA SAROVAR
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