अपनी जान जोखिम में डालकर एक मरीज को अपना ऑक्सीजन मास्क देने वाले डाॅक्टर संकेत 93 बाद कोरोना को हराकर घर लाैट आए। किसी मरीज की जान बचाने के लिए अपनी जान को खतरे में डालने वाले संकेत के फेफड़ों को कोरोना ने पूरी तरह से जकड़ लिया था। एक समय ऐसा लग रहा था कि कोरोना से जिंदगी की जंग हार जाएंगे, लेकिन उन्होंने ठीक होकर अच्छा संकेत दिया कि वे सच्चे वाॅरियर हैं।
चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। डॉ. संकेत का जब सूरत में इलाज चल रहा था तो 3 हफ्ते तक एक्मो (ईसीएमओ) पर रहने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। फेफड़े पूरी तरह खराब हो गए थे, इसलिए लंग्स ट्रांसप्लांट के लिए उन्हें चेन्नई भेजा गया।
हालांकि वहां एक्मो पर इलाज लेने के बाद उनके लंग्स में सुधार आने लगा तो डाॅक्टरों ने लंग्स ट्रांसप्लांट का विचार छोड़ दिया। उनके स्वस्थ होकर घर लाैट आने से उनके परिवार के सदस्यों के साथ शहर के डॉक्टर भी काफी खुश हैं।
फर्स्ट पर्सन
डॉ. संकेत 30 जुलाई को भर्ती हुए थे। उन्हें ऑक्सीजन की कमी थी। 31 जुलाई को उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। इस बीच उन्होंने एक मरीज की जान बचाने के लिए अपना ऑक्सीजन मास्क दे दिया। इससे तबीयत ज्यादा खराब हो गई।
22 अगस्त को एक्स्ट्रा-कॉर्पोरियल मैंब्रेन ऑक्सीजेरेशन (ईसीएमओ) पर रखा गया। तीन हफ्ते बाद भी सुधार नहीं हुआ। लंग्स ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। 13 सितंबर को उन्हें चेन्नई के एमजीएम अस्पताल ले जाया गया। ट्रांसप्लांट की प्रकिया होने के दौरान लंग्स में सुधार आने लगा।
ऐसे ठीक हुए डाॅ. संकेत
पाल के रहने वाले एनेस्थिसिया विशेषज्ञ डाॅ. संकेत के फेफड़ों में कोरोना वायरस का 100% इन्वॉल्वमेंट था। ब्लड में भी इंफेक्शन हो गया। एंटीबायोटिक दवाइयां शुरू की गईं। एक्मो और वेंटिलेटर पर माइनर बदलाव हुए। नींद की गोली जैसी कई दवाइयां बंद कर दी गईं। एस्टोराॅयड दिया गया। एंटी फाइब्रोसिस दिया गया। इलाज के दौरान वह 40 दिन एक्मो पर रहे।
100 दिन बाद बेटी ने किया पिता का विजय तिलक
डॉ. संकेत की पत्नी पीनल महेता ने कहा, मैं अपनी खुशी व्यक्त नहीं कर सकती। मेरी मासूम बेटी 100 दिन से अपने पिता से दूर रही। सभी लोगों का आभार, जिन्होंने हमारी मदद की है। अभी दो महीने तक डॉ. संकेत घर पर आराम करेंगे।
शहर में सबसे ज्यादा 97 दिन में कोरोना को मात देकर लौटे केतन
सूरत. सिविल अस्पताल में सबसे लंबे समय तक इलाज लेने वाले 41 वर्षीय केतन उमरीगर ने 97 दिन आखिरकार कोरोना को हरा दिया। वह 50 दिन ऑक्सीजन पर और 32 दिन वेंटिलेटर पर रहे। 90 दिन तक उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी। केतना उधना के नवसारी मोहल्ले के रहने वाले हैं।
दक्षिण गुजरात के नोडल ऑफिसर डॉ. अमित गामित ने बताया कि केतन को गंभीर हालत में 27 जुलाई को सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया थे। 50 से 60% इंफेक्शन होने से ऑक्सीजन लेवल 48% ही रह गया था। 32 दिन आईसीयू में रहे। उन्हें 10 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट पर 50 दिन रखा गया। दो डोज टोसिलीजुमैब और प्लाज्मा दिया दिया। बाद में नॉर्मल वार्ड में 7 दिन ऑब्जर्वेशन कर शनिवार को डिस्चार्ज कर दिया।
जीवनभर डॉक्टरों की ऋणी रहूंगी: पत्नी
डिस्चार्ज होते समय केतन ने नम आंखों से कहा कि सिविल अस्पताल में बिताए 97 दिन मैं कभी नहीं भूल सकता। कोविड वार्ड मेरे लिए दूसरा घर हो गया था। तमाम डॉक्टर नर्स और कर्मचारी मेरा परिवार बन गया था। केतन की पत्नी मिथिला ने कहा कि 27 जुलाई हमारे लिए संकट का दिन था। हमारे लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो गया था। सिविल के डॉक्टरों की मैं जीवनभर ऋणी रहूंगी।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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