शनिवार काे प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने अहमदाबाद से केवडिया के बीच देश की पहली सी स्लेन सर्विस का शुभारंभ किया। इसे स्पाइस जेट द्वारा शुरू की गई है। इसके लिए स्पाइस जेट ने वाटर एरोड्रम के अनुकूल विशेष प्रकार का 19 सीटर एयरक्राफ्ट बनाया है। यह सेवा आम लोगों के लिए शुरू की गई है।
अहमदाबाद से केवडिया के बीच सफल संचालन होने के बाद स्पाइस जेट ने सूरत से केवडिया तक सी प्लेन उड़ाने की बात कही है। शनिवार को स्पाइस जेट के सीईओ अजय सिंह ने बताया कि हमने सूरत से केवडिया को जोड़ने का मन बनाया है। अजय सिंह ने बताया कि इसके लिए हम लगातार पर्यटन विभाग के संपर्क में हैं। इसके लिए हमें हल्की वाटर बाॅडी एयरक्राफ्ट चाहिए, जो 6 फीट पानी में भी लैंड कर सके।
जून-2018 में हुआ था फिजिबिलिटी सर्वे, सात में से एक लोकेशन को तय किया गया
राज्य सरकार की ओर से जून-2018 में पहली बार सूरत से सी प्लेन सर्विस शुरू करने के लिए फिजिबिलिटी सर्वे किया गया था। तापी नदी के अलग-अलग सात लोकेशन पर सर्वे हुआ था। इसमें से चौथे लोकेशन यानी अश्विनी कुमार के पास पंडित श्यामजी कृष्ण वर्मा हाईलेवल ब्रिज अमरोली को सुनिश्चित किया गया था।
सर्वे में बताया गया था कि अमरोली ब्रिज के पास पानी की मात्रा मानक के आधार पर पर्याप्त है। इसके अलावा यहां बेसिक स्ट्रिप के लिए आवश्यक लंबाई भी है। पानी में एयरक्राफ्ट के लिए टैक्सी-वे बनाने के लिए भी पर्याप्त जगह है। यह लोकेशन सूरत एयरपोर्ट से 20 किमी दूर है। इसके अलावा अन्य 6 लोकेशन को खारिज कर दिया गया था, क्योंकि वहां कुछ ना कुछ कमियां थी। इसमें दलदल जमीन और हाईटेंशन टावर सबसे बड़ी बाधा थी।
अमरोली ब्रिज के पास भी कई अड़चनें
अश्विनी कुमार के पास पंडित श्यामजी कृष्ण वर्मा हाईलेवल अमरोली ब्रिज के पास जो लोकेशन तय किया गया है, वहां भी अड़चन है। इसी एयर स्पेस से सूरत एयरपोर्ट पर लैंड करने वाले विमान अपना फाइनल एप्रोच बनाते हैं।
यानी एयरक्राफ्ट रन-वे की सीध में आने से विमान यहां से डायरेक्ट लेंथ बनाना शुरू करते हैं। यदि यहां से सी प्लेन सेवा शुरू होती है तो विमान की आवाजाही की सबसे बड़ी बाधा सामने अाएगी। सूरत एयरपोर्ट पर रोजाना 48 से ज्यादा विमान उतरते और उड़ान भरते हैं।
दोबारा फिजिबिलिटी सर्वे किया जाएगा
स्पाइस जेट के सीईओ ने सूरत से सी प्लेन सेवा शुरू करने की बात की है। स्पाइस जेट के सूत्रों ने बताया कि अमरोली ब्रिज वाले लोकेशन में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हम दोबारा फिजिबिलिटी देखेंगे। यहां तापी में पानी की गहराई 6 फीट से अधिक होती है।
इससे एयरक्राफ्ट आसानी से वाटर एरोड्रम पर लैंड कर सकेगी। सूरत एयरपोर्ट पर लैंड करने वाले विमानों के फाइनल एप्रोच बनाने वाली स्थिति पर मंथन होगा। इसके लिए आवश्यक उपाय करके बाधाओं को दूर किया जाएगा।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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