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अभिभावक बोले- सात महीने स्कूल बंद रहने से बच्चे प्रार्थना, पीटी भूल चुके, किताबें छूना नहीं चाहते; पढ़ने के लिए मोबाइल ही मांग रहे

लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से बच्चों के व्यवहार में काफी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। बच्चों के व्यवहार में किस तरह का परिवर्तन हुआ यह जानने के लिए वाली (अभिभावक) मंडल ने सोशल मीडिया के जरिये कई अभिभावकों से बात की। अधिकतर अभिभावकों का कहना था कि बच्चों की पूरी दिनचर्या बदल गई है।

पिछले 7 महीने से बच्चे स्कूल नहीं गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई से वे स्कूल में होने वाली प्रार्थना, पीटी भूल गए हैं। अब वे किताबों से पढ़ने में आनाकानी करते हैं और मोबाइल की मांग करते हैं। सुबह जल्दी स्कूल जाने की बात कहने पर रोने लगते हैं। कई अभिभावकों ने कहा कि अभी स्कूल खोलने का बिल्कुल सही समय नहीं है।

कई अभिभावक ऐसा मानते हैं कि राज्य सरकार को इस वर्ष स्कूल नहीं खोलने चाहिए, क्योंकि स्कूलों में बच्चे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर पाएंगे। स्कूलों को भी काफी मशक्कत करनी होगी, क्योंकि स्कूल में बच्चों के लिए समय बिताना आसान नहीं होगा। शिक्षकों को बच्चों पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

स्कूलों को बच्चों पर ज्यादा ध्यान देना होगा
अब स्कूल खोलने की छूट मिलने से अभिभावक बच्चों को सुबह जल्दी उठा रहे हैं, उनसे स्कूल की तरह पीटी भी करवा रहे हैं, ताकि स्कूल जाने में उन्हें दिक्कत न हो। दूसरी तरफ अभी भी कुछ अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। बच्चे किताबों की जगह वीडियो या ऑडियो के माध्यम से पढ़ना पसंद कर रहे हैं। कई बार मोबाइल के लिए वे जिद पर उतर आते हैं।

इससे घर में तनावपूर्ण माहाैल बन जाता है। अभिभावकों के मुताबिक स्कूल खुलेंगे नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ेगी। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए पहले जैसी दिनचर्या में ढालना होगा। बच्चों को सुबह उठाना, किताबें तैयार करना, स्कूल छोड़ने जाना नए सिरे से शुरू करना होगा। इसके अलावा स्कूलों में बच्चों के लिए समय बिताना मुश्किल होगा। बच्चों के स्कूली जीवन पर काफी असर पड़ चुका है
कोरोना की वजह से जिस तरीके से बच्चे, माता-पिता और स्कूलों के कामकाज बदले हैं उससे जब भी स्कूल खुलेंगे इसका असर देखने को मिलेगा। इसके लिए माता-पिता और स्कूलों को आपसी सहमति से बच्चों के नए भविष्य के लिए तैयारी करनी होगी, क्योंकि कोविड-19 में पढ़ाई के साथ-साथ घर में रहने से बच्चों के स्कूली जीवन पर काफी असर पड़ा है।
उमेश पांचाल, प्रमुख, वाली मंडल

बच्चों के स्कूली जीवन पर काफी असर पड़ चुका है
कोरोना की वजह से जिस तरीके से बच्चे, माता-पिता और स्कूलों के कामकाज बदले हैं उससे जब भी स्कूल खुलेंगे इसका असर देखने को मिलेगा। इसके लिए माता-पिता और स्कूलों को आपसी सहमति से बच्चों के नए भविष्य के लिए तैयारी करनी होगी, क्योंकि कोविड-19 में पढ़ाई के साथ-साथ घर में रहने से बच्चों के स्कूली जीवन पर काफी असर पड़ा है।
उमेश पांचाल, प्रमुख, वाली मंडल

अब ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी, स्कूल तैयार हैं
बच्चों के लिए अभिभावक और स्कूल दोनों को तैयार होना पड़ेगा। यहां तक कि बच्चों की इस मानसिकता से निकालने के लिए स्कूलों को अब अलग तरीके से मेहनत करने की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए स्कूल तैयार हैं, ताकि बच्चों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ ना हो पाए।
दीपक राजगुरु, प्रवक्ता, स्कूल संगठन



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फाइल फोटो


Source From
RACHNA SAROVAR
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