सुप्रीम कोर्ट के नगर निगम चुनाव पर रोक लगाने से इनकार के बाद राजनीतिक दलों के साथ जिला प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी है। ईवीएम की चैकिंग 12 अक्टूबर से शुरू कर दी जाएगी। सहायक मतदान केंद्रों के लिए नए स्थानों का चयन किया जा रहा है।
वहीं, 250 वार्डों में बड़ी संख्या में प्रत्याशियों के उतरने की संभावना को देखते हुए नामांकन के लिए भी कलेक्ट्रेट के अलावा अन्य स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है। राजनीतिक पार्टियों में पार्षदों की टिकट के दावेदार अब सामने आने लगे हैं और जोड़-तोड़ में जुट गए हैं।
जयपुर हेरिटेज व ग्रेटर निगम में मेयर ओबीसी महिला होगी। इसके लिए सामान्य वार्ड से जीती महिला भी मेयर बन सकेंगी। इसलिए ओबीसी के साथ उन सामान्य वार्डों में भी ओबीसी महिलाओं की दावेदारी सामने आने लगी है। कई पूर्व पार्षद पुराने वार्ड आरक्षित होने पर दूसरे वार्डों में जमीन तलाश रहे हैं।
इस बार मुकाबला रोचक; शहर की 10 विधानसभा सीटों में से 6 पर कांग्रेस काबिज
नगर निगम क्षेत्र के 10 विधानसभा क्षेत्रों में से 6 पर कांग्रेस और 4 पर बीजेपी के विधायक हैं। किशनपोल, हवामहल, आदर्श नगर, सिविल लाइन, झोटवाड़ा और बगरू विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के विधायक हैं। वहीं, आमेर, मालवीय नगर, सांगानेर और विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी का कब्जा है।
इस वजह से मुकाबला बड़ा रोचक होने वाला है। निगम के पूर्व निदेशक (विधि) अशोक सिंह का कहना है- ओबीसी, ओबीसी महिला, सामान्य या सामान्य महिला सीट से जीतने वाली ओबीसी वर्ग की महिला मेयर पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर सकती है।
उधर, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय होने के बाद ही दोनों पार्टियों में टिकिट के लिए मशक्कत शुरू हो गई। दोनों ही पार्टियों में अंदरखाने मंथन शुरू तो गया है, लेकिन पार्टियां पत्ते नहीं खोल रही है। टिकट वितरण के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मेयर पद के लिए कौन दावेदार रहेगा।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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