राज्य सरकार ने कोरोना के बढ़ने मामले को देखते हुए पीजी पासआउट बाॅन्डेड डॉक्टरों को कोरोना में ड्यूटी लगाने की तैयारी कर ली है। वर्ष 2016-17 में पीजी पासआउट डॉक्टरों को दो दिन के भीतर अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का आदेश दे दिया है।
ऐसा नहीं करने पर डॉक्टरों के खिलाफ जिला कलेक्टर को गुजरात एपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई करने का अधिकार दिया है। इसे लेकर डॉक्टरों में नाराजगी है।
उनका कहना है कि हम सेटल हो चुके हैं। ज्यादातर डॉक्टर अलग-अलग विभाग के हैं। सभी को कोरोना में ड्यूटी करवाने का कोई मतलब नहीं है। ऑर्थो, सर्जरी, गायनिक, पैथोलॉजी जैसे विभाग के डॉक्टर को कोरोना के इलाज की कोई जानकारी नहीं है। यह मेडिसिन विभाग के डॉक्टर ही करते हैं।
इसके अलावा महज दो दिन का समय दिया है। ऐसे में कौन डाॅक्टर कहां है, किस हालत में है यह सरकार नहीं समझ रही है। इस मुद्दे पर राज्य की स्वास्थ्य सचिव जयंति रवि से दो बार फोन कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
सूरत के 12 सहित राज्य के 30 जिलों में 2016-17 में पीजी पासआउट डाॅक्टर बुलाए गए
6 माह कोविड में ड्यूटी करें और बाॅन्ड मुक्त हो जाएं
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज में पीजी में स्टेट कोटा से एमडीएमसी की पढ़ाई करने के बाद डाॅक्टरों को तीन साल तक सरकार के आदेश पर ड्यूटी करनी पड़ती थी।
अब इसे मात्र एक साल कर दिया गया है। 2013-14 में प्रवेश लेने और वर्ष 2016-17 में पास हुए पीजी बाॅन्डेड डॉक्टरों को अब छह माह कोविड में ड्यूटी करनी होगी। उसके बाद उन्हें बाॅन्ड से मुक्त कर दिया जाएगा। अभी डॉक्टरों की जगह खाली होने से मरीजों को मुश्किल हो रही है।
यह डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर नहीं आए हैं। समस्या नहीं हो, इसलिए बाॅन्डेड डॉक्टरों को हाजिर होना होगा। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ एपिडेमिक एक्ट 1897 के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पैथालाॅजी की पढ़ाई की, लैब में काम नहीं दे रहे, कोरोना का इलाज कैसे करूंगी
बनासकाठा की रहने वाली और वडोदरा के काॅलेज से पीजी पासआउट एक डॉक्टर ने कहा- मैंने पैथोलॉजी की पढ़ाई की है। सरकार लैब में काम नहीं दे रही। कोरोना में ड्यूटी लगा रही है। अब मुझे कोरोना के बारे में या मेडिसिन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं कोरोना के मरीजों का इलाज कैसे कर पाऊंगी।
कई डाॅक्टर तो दूसरे प्रदेश और विदेश में, 2 दिन में कैसे आएंगे
सूरत, अहमदाबाद, वडोदरा, भावनागर, राजकोट के कई डॉक्टरों ने कहा कि हम सेटल हो चुके हैं। कई लोग अन्य प्रदेश या विदेश जा चुके हैं। उनका अचानक हाजिर होना मुश्किल है। ऐसा लगता है कि हमने डॉक्टर की पढ़ाई करके कोई गुनाह कर दिया है। इतने कम समय में सरकार का आदेश कैसे पूरा होगा।
आदेश नहीं माना तो जेल भेज दिया जाएगा। हम ड्यूटी के बदले 10 लाख रुपए का बाॅन्ड भरने को तैयार हैं। बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर डॉक्टर अलग-अलग विभाग के हैं। वे कोविड का इलाज नहीं जानते।
सरकार मनमानी कर रही है
अहमदाबाद की रहने वाली और वडोदरा के काॅलेज से पीजी पासआउट एक डॉक्टर ने बताया कि यह सरकार की मनमानी है। हम क्या कर सकते हैं। सरकार को हर हाल में डॉक्टर चाहिए। वह कुछ भी निर्णय ले रही है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Source From
RACHNA SAROVAR
CLICK HERE TO JOIN TELEGRAM FOR LATEST NEWS

Post a Comment