वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी अब नकलची छात्रों पर सख्ती करने की तैयारी कर रही है। फैक्ट कमेटी में बदलाव किया जाएगा। इसके लिए यूनिवर्सिटी ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नकल में पकड़े जाने वाले छात्रों की सजा तय की जाएगी। सिंडिकेट में सदस्यों ने फैक्ट कमेटी के नियमों को बदलने को कहा था। उसके बाद सिंडिकेट में इस पर बदलाव का निर्णय लिया गया। अब कमेटी बना दी गई है।
पूर्व कुलपति शिवेंद्र गुप्ता ने अपने कार्यकाल के दाैरान आचार्य समिति को भंग कर फैक्ट कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी का काम नकल में पकड़े जाने वाले छात्रों पर कार्रवाई करना था। सिंडीकेट के सदस्यों ने फैक्ट कमेटी के कई फैसलों को गलत बताया। मांग की कि एक कमेटी बनाकर नियमों में बदलाव करना चाहिए। उन्होंने नकलची छात्रों पर सख्ती दिखाने की भी बात कही। नई कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सजा तय की जाएगी।
फैक्ट कमेटी: 500 रु. दंड व नकल वाले विषय में फेल की सजा देती है
3 साल में नकल के किसी मामले में फैक्ट कमेटी ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। नकल पर अंकुश लगाने के लिए भी कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया। ज्यादातर नकलची छात्रों को ₹500 रुपए दंड के साथ उस विषय में फेल कर दिया गया, जिसमें वे नकल करते पकड़े गए थे।
इस बारे में तर्क दिया गया कि छात्रों का भविष्य न खराब हो इसलिए उन्हें नॉर्मल सजा दी जा रही है। इससे नकल करने वाले छात्र आसानी से बच जा रहे थे। अब सख्ती दिखाने के लिए कमेटी की तरफ से रिपोर्ट सौंपने के बाद उसे सिंडिकेट में रखा जाएगा।
सदस्य: पुराने नियम दोषपूर्ण, बदलाव किया जाना चाहिए
सिंडिकेट सदस्य किरण घोघारी ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सिंडिकेट में चर्चा हुई थी। फैक्ट कमेटी में ऐसे कई मामले हैं जिनमें यह साबित हो जाने पर कि छात्र नकल करते पकड़ा गया है तो उसमें भी वहीं सजा मिलती थी जो नकलची छात्र के सह आरोपी को मिलती थी।
इससे तो नकल रुकने की बजाया उसे बढ़ावा मिलता है। यह नियम दोषपूर्ण है। इससे नकलची छात्रों में कोई डर नहीं होता, इसलिए इसमें बदलाव किया जाना चाहिए।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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