कोरोना काल के बाद एक ओर सिविल अस्पताल की कई मेडिकल सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है, लेकिन दूसरी और ट्रॉमा सेंटर की हालत खस्ता हो गई है। गंभीर मरीजों को प्राथमिक इलाज के लिए यहां वहां भटकना पड़ रहा है। ट्रॉमा सेंटर का एक्सरे, आईसीयू, पोर्टेबल एक्सरे, वेंटिलेटर जैसी तमाम जरूरी सुविधा बंद हो गई हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को यहां से वहां भटकना पड़ रहा है।
ट्रॉमा सेंटर में रोड एक्सीडेंट, एक्सीडेंट, जहर पीने, फांसी लगाने, मार पीट, हार्ट अटैक, ब्रेन हैमरेज जैसी समस्या के साथ मरीज आते हैं। ऐसे में उन्हें सबसे कम समय में इलाज मिलना जरूरी हो जाता है। हड्डी के लिए सबसे ज्यादा जरूरी एक्सरे ही बंद हैं। इसके लिए मरीज को 200 मीटर दूर रेडियोलॉजी विभाग में जाना पड़ता है।
इस समय ट्रॉमा सेंटर के पास कंस्ट्रक्शन चल रहा है ऐसे में मरीजों को और भी समस्या हो। वहीं गंभीर रूप से फ्रैक्चर के मरीजों के लिए पोर्टेबल एक्सरे का भी इंतजाम यहां था ताकि मरीजों को बेड पर ही एक्सरे जांच हो सके। लेकिन इसे भी यहां से हटा दिया गया है। गंभीर हालत में आईसीयू के मरीजों के लिए भी संकट है। यहां का 3 बेड का आईसीयू फिर से बंद पड़ गया है।
कोरोना के मरीज आने के बाद सुविधाएं बंद की
ट्रॉमा सेंटर में कुछ समय के लिए कोरोना मरीजों का इलाज हुआ। कोविड 19 अस्पताल में कोरोना मरीजों को भर्ती किया जाने लगा। इस बीच सिविल पूरी तरह से कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाया जा चुका था। ऐसे में सामान्य बीमारी के मरीज आने बंद हो गए।
ट्रॉमा सेंट्रर में भी इक्का-दुक्का मरीज ही आ रहे थे। मरीजों की संख्या बहुत ही कम होने पर यहां की लगभग सभी सुविधाएं बंद कर दी गईं। स्टाफ भी कोरोना ड्यूटी में हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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