कृषि उपज मंडी में सीसीआई द्वारा हो रही कपास खरीदी पर सवाल उठने लगे हैं। एक सप्ताह से सीसीआई की इस कार्यशैली से परेशान होकर किसानों का आक्रोश बुधवार को फूटा। कपास के वाहन मंडी में छोड़ किसान सड़क पर उतर आए। महेश्वर-बड़वाह मार्ग पर किसानों ने करीब 1 घंटे तक चक्काजाम किया। किसानों ने हक व अधिकारों को लेकर नारेबाजी भी की। हंगामे के दौरान नीलामी पूरी तरह से स्थगित कर दी गई। मंडी प्रबंधन की सूचना पर एसडीओपी मानसिंह ठाकुर व तहसीलदार विवेक सोनकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझाकर आवागमन शुरू कराया। किसान व सीसीआई दोनों से खरीदी को लेकर तय मापदंड के आधार पर किसानों के कपास को बिना किसी भेदभाव के पूर्ण जांच परख कर ही खरीदने की बात कही। व्यापारियों के पहुंचने पर एक बार बीच में खरीदी शुरू होने के बाद फिर से किसान खरीदी प्रक्रिया पर आक्रोशित हो उठे। जिसके बाद नीलामी कुछ समय के लिए बंद की गई। मंडी प्रबंधन, तहसीलदार व व्यापारियों से किसानों की सहमति के बाद खरीदी फिर से शुरू हुई। किसानों ने आरोप लगाकर कहा सीसीआई खरीदी की मात्र खानापूर्ति कर रही है। सीसीआई अधिकारी मंडी घूमने के लिए आते हैं। गाड़ी चिंहित कर चले जाते हैं। चिंहित लोगों का माल असिस्टेंट खरीद लेता है जबकि कई किसानों के कपास को ऊपर से देखकर व नमी मापदंड अनुसार न होने का बहाना बनाकर निरस्त कर देते हैं। इस तरह न तो नमी मापने का यंत्र इस्तेमाल किया जाता है और न हो उचित कारण बताया जाता है।
सीसीआई खरीदी व स्टाॅक को करेंगे चेक
इस संबंध में मंडी सचिव रचना टिकेकर ने कहा सीसीआई अपने पैरामीटर के अनुसार खरीदी कर रही है लेकिन उन्हें ये भी हिदायत दी गई है कि वे किसान को संतुष्ट कराकर ही खरीदी करें। यदि कोई किसान चाह रहा है तो नमी मापक यंत्र लगाए व खरीदी न कर पाने का उन्हें कारण भी बताए। एक ही कपास के अलग-अलग भाव क्यों मिले। इस बारे में जांच करेंगे।
किसानों का आरोप गलत है
^किसानों का आरोप गलत है। हम केवल सीसीआई द्वारा निर्धारित मापदंड अनुसार ही कपास खरीद सकते हैं लेकिन किसान चाहते हैं वर्षा प्रभावित काला, पीला कपास भी खरीदे। जो संभव नहीं है। एफएक्यू वाला कपास जिसमें 8 से 12 प्रतिशत नमी है। वे ही खरीद सकते हैं। 22 अक्टूबर से अभी तक खरीदी कर लगभग 4 हजार क्विंटल कपास खरीदा है।
गीत जैन, असिस्टेंट कमर्शियल एक्जुकेटिव, सीसीआई
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Source From
RACHNA SAROVAR
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