रुंढ, मगदल्ला में टीपी 28, एफपी 32 में वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 660 आवास का ड्रॉ किया गया था। इसके बाद से इसका निर्माण भी शुरू कर दिया गया। 15 मार्च 2019 को लाभार्थियों को आवास सौंप देना था, पर मनपा की लापरवाही से अभी तक आवास का निर्माण ही पूरा नहीं हो पाया है।आवास न मिलने की वजह से लाभार्थियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
कोरोनाकाल में सब कुछ बंद होने की वजह से लोग पहले से ही परेशान हैं। आवास की किस्त और जहां रह रहे हैं वहां का किराया भी लाभार्थियों काे चुकाना पड़ रहा है। रुंढ आवास में मनपा की लापरवाही से अभी तक बिजली, पानी, ड्रेनेज के काम भी अधूरे ही पड़े हैं। अभी तक इसका निर्माण कार्य चल रहा है।
आवास का कब्जा न मिलने पर मंगलवार को लाभार्थियों ने मनपा मुख्यालय में मोर्चा निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। ज्ञातव्य है कि प्रधानमंत्री आवास में मकान लेने वाले गरीब और मध्यमवर्ग के लोग हैं, जिनकी मासिक कमाई 10 से 30 हजार रुपए है।
कोरोनाकाल में मकान का किराया और आवास की किस्त, घर खर्च चलाने में लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। लाभार्थी जल्द आवास देने की मांग कर रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन करने वाले लाभार्थियों ने मनपा आयुक्त से मकान का कब्जा देने की मांग की। मनपा आयुक्त ने जवाब में कहा कि डिप्टी कमिश्नर से बुधवार को इस पर चर्चा करेंगे। मनपा आयुक्त ने जल्द आवास बनाकर कब्जा दिलाने का आश्वासन दिया है। इसके बाद विरोध कर रहे लाभार्थी वहां से चले गए।
मनपा आयुक्त ने साढ़े तीन महीने पहले यानी 17 अगस्त 2020 को भी लाभार्थियों को आवास का कब्जा दिलाने का आश्वासन दिया था। आयुक्त ने कहा था कि दो महीने का आवास का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, पर अभी तक कुछ नहीं हुआ।
लाभार्थियों की पीड़ा
1. 20 हजार तनख्वाह है, 6470 किस्त, 6700 किराया देता हूं
प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान लेने वाले नरेश खत्री ने बताया कि मैं नौकरी करता हूं। 20 हजार रुपए मेरी तनख्वाह है। जिसमें से 6470 रुपए आवास की किस्त और 6700 रुपए जहां रहता हूं वहां का किराया चुकाता हूं। केवल 7 हजार रुपए ही बचते हैं।
इसमें घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरे खर्च कम पड़ जाते हैं। पिछले तीन महीने से मैंने मकान का किराया और आवास की किस्त नहीं चुकाई है। किस्त न भरने पर ब्याज चुकाने का दबाव डाला जा रहा है। मनपा आवास दे देती तो मकान का किराया बच जाता और घर खर्च चलाने में कुछ आसानी होती। पिछले एक साल से सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। आवास में मकान लेने वाले हमारे जैसे और भी लोग परेशान हैं। मनपा अधिकारी हमारी परेशानी और मजबूरी नहीं समझ रहे हैं।
2. स्कूल ऑटो चलाता हूं, लॉकडाउन के बाद कुछ कमाई नहीं हो रही
कौशिक लेलियावाला स्कूल ऑटो चलाते हैं। लॉकडाउन से स्कूल बंद होने की वजह से ऑटो भी बंद हैं। इस वजह से ऑटोचालकों की कुछ कमाई नहीं हो रही है। कोरोना संक्रमण की वजह से लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं, इससे दिन में भी कोई कमाई नहीं हो रही है।
मेरी पत्नी गुजराती टाइपिस्ट का काम करती है। उसकी कमाई से घर का खर्च चल रहा है। मार्च-2019 से आवास की 6400 रुपए किस्त चुका रहा हूं। दूसरे के मकान में रहता हूं और 4000 प्रतिमाह किराया देता हूं। कोरोनाकाल में किस्त और किराया चुकाने में बहुत मुश्किल हो रही है। अब तो घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हाे गया है। महानगर पालिका आवास देने के बदले वादे पर वादे कर रही है।
3. आवास कब मिलेगा, कह नहीं सकते, अधिकारी जवाब नहीं देते
कांतिभाई जादव ऑटोरिक्शा चलाते हैं और जमीन की दलाली भी करते हैं। कांतिभाई ने बताया कि मार्च-2019 में ही आवास का कब्जा देना था, पर अभी तक नहीं मिला। अब कोरोनाकाल का बहाना करके मनपा आवास देने में देरी कर रही है।
आवास में मकान बुक कराने वाले डेढ़ साल से बैंक की किस्त चुका रहे हैं। मकान कब मिलेगा, कहना बहुत मुश्किल है। मनपा अधिकारी-कर्मचारी ठीक से जवाब भी नहीं देते हैं। लॉकडाउन से पहले स्थिति अच्छी थी, ऑटोरिक्शा और जमीन दलाली से कमाई हो जाती थी। तब किस्त चुकाने में कोई परेशानी नहीं होती थी। किस्त चुकाने में भी परेशानी हो रही है। बैंक वाले किस्त जमा करने के लिए दबाव डालते हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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