वर्ष 2019 में गूगल प्ले स्टोर में सूरत की अलग- अलग आईटी कंपनियों ने 4 हजार से ज्यादा एप्लीकेशन अपलोड किया था। इसके लिए गूगल ने पेमेंट के तौर पर 4 हजार करोड़ रुपए चुकाए थे। इस आंकड़े से कह सकते हैं कि अब सूरत धीरे-धीरे आईटी हब बनने की ओर अग्रसर है। कारण दो साल की अवधि में ही सूरत में 1600 छोटी- बड़ी आईटी कंपनियां बनी हैं।
जिनमें 16 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। दूसरी ओर आईटी क्षेत्र की पढ़ाई कर बाहर नौकरी करने के लिए बेंगलुरू, पुणे और मुंबई गए बड़ी संख्या में युवा सूरत आकर अपनी कंपनी स्थापित कर रहे हैं। इन कंपनियों को प्रोत्साहन देने और सपोर्ट करने के लिए चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा पहली बार आई कमेटी का गठन किया गया है। जबकि आईटी कंपनियां मिलकर साउथ गुजरात इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी सोसाइटी की स्थापना करने जा रही हैं।
आउट सोर्सिंग का काम 4 हजार करोड़ से ज्यादा का
सूरत में आउट सोर्सिंग का भी काम बड़े पैमाने पर हो रहा है। विशेषकर बैंक साफ्टवेयर, फूड प्रोडक्शन कंपनी के साफ्टवेयर का काम। एक अनुमान के अनुसार आउट सोर्सिंग का वार्षिक कारोबार 4 हजार करोड़ का है।
सूरत के 3 हजार आईटी छात्र दूसरे शहरों में हैं
सूरत से हर साल बीएससी आईटी, एमएससी आईटी, बीसीए, एमसीए, कंप्यूटर साइंस कर करीब 6 हजार छात्र बाहर निकलते हैं। इनमें से 3 हजार छात्र बेंगलुरू मुंबई, पुणे जैसे शहरों में नौकरी के लिए जाते हैं।
शहर में अब 22 हजार ऑनलाइन सेलर हो गए
शहर में आईटी के साथ ऑनलाइन सेलिंग का भी कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है। ऑनलाइन कंपनियां मिलकर टोटल रजिस्टर सेलर शहर में 2 हजार हैं। जबकि 20 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट सूरत से पूरे देश में सप्लाई किए जाते हैं।
आईटी क्षेत्र में एसोसिएशन बने तो ये काम आगे बढ़ेंगे
डायमंड बुर्स की तरह एक ही जगह पर सभी आईटी कंपनियां हो इसके लिए जमीन की व्यवस्था कर आईटी हब बनाया जाएगा। {आईटी कंपनियों के लिए हाईस्पीड इंटरनेट और विद्युत की व्यवस्था। { विदेशी कंपनियों से काम आउटसोर्सिंग करने का प्रयास, बड़ी आईटी कंपनियों की शाखा लाने का प्रयास।
मैं खुद एक आईटी कंपनी चला रहा हूं। नेशनल बैंकों का आउट सोर्सिंग का काम कर रहा हूंं। आईटी क्षेत्र में सूरत हब बने, युवाओं को रोजगार मिले इसके लिए चैंबर ऑफ कॉमर्स में पहली बार आईटी कमेटी का गठन किया गया है। इसके अलावा साउथ गुजरात इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी सोसाइटी का नाम रजिस्ट्रेशन को दिया है। -गणपत धामेलिया, चेयरमैन, चैंबर आईटी कमेटी
मैं बेंगलुरू की एक कंपनी में जॉब करता था। जॉब छोड़ सूरत आ गया। अब एप्लीकेशन बनाकर गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड कर रहा हूंं। फोटोग्राफी कैटेगरी में मेरी एक एप टॉप-10 में है। मेरा काम अच्छा होने से गूगल ने मुझे एक असिस्टेंट दिया है, जो बेंगलुरू में रहता है। मुझे जब कोई समस्या होती है तब वह मदद करता है।
-सतीष शंकर, एप डेवलपर
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Source From
RACHNA SAROVAR
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