पॉलिएस्टर के प्रोडक्शन में भारत का मैनचेस्टर माने जाने वाले सूरत में कपड़े के प्रोडक्शन का नया ट्रेंड शुरू हुआ है। लॉकडाउन के बाद देश-विदेश में सर्कुलर और वॉर्प निटिंग मशीन पर बनने वाले नायलॉन-पाॅलिएस्टर फैब्रिक्स की डिमांड है। डेनिम प्रोडक्शन में भी 8 कंपनियां प्रोडक्शन कर रही हैं।
जापान-ताइवान से फैब्रिक्स का आयात 50 प्रतिशत घट गया है। कोरोना से देश-विदेश के कारोबार पर असर पड़ा है। मार्च में लॉकडाउन से सूरत का टेक्सटाइल उद्योग भी प्रभावित हुआ था। सूरत में रोजाना 4 करोड़ मीटर कपड़े का उत्पादन होता था, जो घटकर 2.50 करोड़ हो गया।
लॉकडाउन के बाद सूरत के कुछ उद्योगपतियों ने कॉटन के कपड़े की प्रोसेसिंग शुरू की। सरकार की मशीनरी अपग्रेडेशन योजना का लाभ लेते हुए शहर के उद्योगपतियों ने सर्कुलर और वॉर्प निटिंग मशीनरी से साड़ी और ड्रेस मैटीरियल्स का उत्पादन करने वाले सूरत की पहचान बदल दी है। नायलॉन और पॉलिएस्टर के कपड़े से टी-शर्ट, शर्ट और नायलॉन से साड़ी का प्रोडक्शन सूरत में शुरू हो चुका है।
तीस फीसदी मिलें कॉटन प्रोसेस कर रहीं: तुलस्यान
कपड़ा उद्यमी कमल तुलस्यान ने बताया कि 30 फीसदी मिलें कॉटन प्रोसेस करने लगी हैं। सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर पिछले 3 से 4 साल में मशीनरी में अपग्रेडेशन करने से सर्कुलर और वॉर्प निटिंग को बड़ा ग्रोथ मिला है। सूरत में बनने वाले कपड़े की दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरू के साथ वैश्विक बाजार में भी भारी मांग है। पहले जापान और ताइवान से सर्कुलर और वॉर्प निटिंग का कपड़ा सूरत आता था। अब वह घटकर आधा हो गया है।
50 लाख मीटर कॉटन कपड़े की प्रोसेसिंग
स्थानीय लेवल पर गारमेंट का प्रोडक्शन हो रहा है। डेनिम के साथ-साथ अन्य गारमेंट में भी कॉटन प्रोसेसिंग कपड़े की मांग है। सूरत की 30 फीसदी मिलों में रोजाना 50 लाख मीटर कॉटन कपड़े की प्रोसेसिंग हो रही है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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