मार्च में लॉकडाउन के साथ और मंदी की चपेट में आया रियल एस्टेट अब फिर पटरी पर है। शहर की नई काॅलोनियों में भूखंड के साथ बने बनाए मकान खरीदने का ट्रेंड भी बढ़ा है। गत फेस्टिवल सीजन में लोग प्राॅपर्टी में निवेश के प्रति आकर्षित हुए ही।
इसके बाद और अभी मलमास में भी प्राॅपर्टी कारोबार ठंडा नहीं पड़ा। अकेले शहर में हर महीने औसत 700 से 800 राजिस्ट्रियां हो रही हैं। उप पंजीयक कार्यालय में वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीने अप्रैल में मात्र एक रजिस्ट्री हुई थी। हालांकि इसका कारण लॉकडाउन था। लाॅकडाउन खुलने के बाद पहले से लंबित रजिस्ट्रियां की कार्रवाई शुरू हुई। फिर भी मई में 187 रजिस्ट्रियां होने के साथ 30.87 लाख की आय हुई। इसके बाद रियल स्टेट ने तेजी पकड़ी। जून में एकदम 816 रजिस्ट्रियों से विभाग को तीन करोड़ 84 लाख 50 हजार की आय हो गई।
जुलाई में रजिस्ट्रियों की संख्या 955 और आय का आंकड़ा तीन करोड़ 59 लाख रहा। अगस्त में मानसूनकाल के कारण गति कुछ कम हुई। फिर भी 704 रजिस्टियों से दो करोड़ 87 लाख 19 हजार का राजस्व मिला। सितंबर में 833 रजिस्ट्रियों से तीन करोड़ 57 लाख 80 हजार रुपए मिले। अक्टूबर में रजिस्ट्रियां भले 737 ही हुई पर बड़े सौदे होने से 4 करोड़ 38 लाख 20 हजार की आय हुई। इस माह अकेले 485 सेल डीड थी। कुल मिलाकर औसत हर माह 700 से 750 रजिस्ट्रियां हो रही हैं। नवंबर में भी 384 सेल डीड हुई।
कुल राजस्व दो करोड 98 लाख हुआ। सुखद आर्श्चय की बात यह कि आधे मलमास वाले दिसंबर में सेल डीड और बढकर 491 हो गई। इससे तीन करोड़ 54 लाख का राजस्व मिला है। अभी ज्यादातर शुद्धि पत्र, पट्टे, सेल, गिफ्ट, वसीयत आदि की रजिस्ट्रियां हो रही हैं। खाली प्लाट के साथ बने मकान, फ्लेट लोग ज्यादा खरीद रहे हैं। जनवरी के प्रथम सप्ताह तक इस वित्तीय वर्ष का 60 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो गया। इस साल कुल लक्ष्य 41.99 करोड़ के मुकाबले अब तक 25.11 करोड़ प्राप्त हो चुका है।
नए साल 2021 के शुरूआती 5 दिन को ही देखे तो दो दिन अवकाश के बावजूद 137 रजिस्ट्रियां हुई । इसमें 42 सेल डीड है। कुल 39 लाख 11 हजार का राजस्व को मिल गया है।
मात्र दो राजिस्ट्रियों से ही मिल गए 80 लाख रुपए
उप पंजीयक कार्यालय चित्तौड़गढ़ को अक्टूबर में एक औद्योगिक इकाई के दो विक्रयनामों से ही 80 लाख का राजस्व मिल गया। इस महीने सबसे ज्यादा 485 विक्रय पत्र पंजीकृत हुए।
एक ही दिन में हुई 47 रजिस्ट्रियां
30 अक्टूबर से एक नवंबर तक तीन दिन राजकीय अवकाश रहा। इसके बाद एक ही दिन में 47 रजिस्ट्रियां हो गई। जिसमें 41 सेल, 4 गिफट, एक पटटा रहा। इससे 26 लाख 78 हजार की आय हो गई। नवरात्र में पंचमी के दिन तो रिकार्ड 185 रजिस्ट्रियां हुई थी।
2 साल पहले 100 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ था
सन 2018-19 में चित्तौडगढ उपपंजीयक कार्यालय का लक्ष्य 100 प्रतिशत पूरा हो गया था। हालांकि इसमें अकेले 9 करोड़ रुपए एक इंडस्ट्री ग्रुप के जमीन हस्तांतरण से मिले पर इसके चलते अगले साल लक्ष्य बढाकर 51 करोड़ कर दिया गया। विभाग इसकी तुलना में 26 करोड यानी आधा लक्ष्य ही हासिल कर पाया। इस वर्ष लक्ष्य फिर कम कर 41.99 करोड रखा गया है।
बाहर के प्राइवेट काॅलोनाइजर्स और बिल्डर्स का भी बड़ा विनिवेश
शहर में प्राॅपर्टी कारोबार इसलिए भी उफान पर रहा कि बीते पांच साल में कई नई काॅलोनियां कटी। बाहर से आए कर्मचारी, मध्यमवर्गीय लोग और संयुक्त परिवारों के सदस्य भविष्य की प्लानिंग के साथ नई सोसायटी व एरिये में मकान या प्लाट खरीदने लगे। कालोनाइजर पहले से या बाद में खरीदी कृषि भूमियों को कन्वर्ट कराकर अब भूखंड बेच रहे हैं।
जानिये, रियल एस्टेट में बढ़ी हलचल के कारण
लॉकडाउन के बाद सरकार की ओर से रियायत, होम लोन सस्ते होना
आने वाल समय में जमीनों की कीमतें और बढनें की आशंका से सक्षम या जरूरतमंद लोग प्राॅपर्टी खरीद रहे हैं। अभी होम लॉन सस्ते हो गए। पीएम आवास योजना में सब्सिडी मिल रही है। लॉकडाउन से बाजार की मंदी दूर करने के लिए सरकार ने आसान ऋण व सब्सिडी योजनाएं दी। इससे खरीदार, बिल्डर और कालोनाइजर उत्साहित हुए।
दो दिशाओं में आवासीय विस्तार
शहर का विस्तार खासकर नई काॅलोनियां का क्रम निम्बाहेड़ा व उदयपुर मार्ग पर ज्यादा है। गत 5 साल में गंभीरी नदी के आसपास चामटीखेड़ा-ओछड़ी मार्ग व संगम मार्ग इलाकों में आवासीय क्षेत्र बढ़ रहा। फोरलेन किनारे तक आवासीय बस्तियां पहुंच रही है। नगर परिषद की महेशपुरम और श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवासीय योजनाओं में अब मकान निर्माण और सौदों की हलचल है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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