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तीन साल पढ़ाकर बना दिया ग्रेजुएट, एलएलबी भी हो गई; अब बार काउंसिल ने पकड़ा फर्जीवाड़ा

26 वर्षीय उर्वशी खोलिया ने नौकरी करने के साथ ग्रेजुएशन करने का निर्णय किया। लेकिन, उसने किसी अप्रूव्ड डिस्टेंस लर्निंग सेंटर की बजाय एक कोचिंग सेंटर टाइप जगह एडमिशन ले लिया। संचालक ने उसको भरोसा दिलाया कि ग्रेजुएशन की जो डिग्री दी जाएगी वो पूरी तरह ऑरिजिनल होगी। इसके लिए बाकायदा तीन साल क्लास चलाकर उसको ग्रेजुएशन की डिग्री भी दी गई।

उसी डिग्री के आधार पर वीर नर्मद यूनिवर्सिटी से एलएलबी भी किया, लेकिन जब गुजरात बार काउंसिल से सनद लेने के अप्लाई किया तो पता चला कि उसकी ग्रेजुएशन की डिग्री फर्जी है। सनद(लाइसेंस) तो मिला नहीं उल्टा उनके ऊपर अहमदाबाद के सोलापुर थाने में आईपीसी की धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 114 के तहत मामला दर्ज हो गया है। अब उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हो गया है।

ऐसा सिर्फ उर्वशी के साथ नहीं हुआ, बल्कि 13 और युवा हैं। वहीं फर्जी डिग्री बेचने वाला सेंटर बंद हो गया है और संचालक फरार हैं। फर्जीवाड़े फंसे युवाओं का कहना है कि उन्होंने तो झांसे में आकर फेंक डिग्री हासिल कर ली, लेकिन वीएनएसजीयू को तो डिग्री की जांच करनी चाहिए थी। अगर समय रहते उन्होंने डिग्री जांची होती तो इनता वक्त बेकार न जाता। दूसरे अन्य लोग जो इस फर्जीवाड़े के शिकार हुए उन्हें भी बचाया जा सकता था।

चार बैच में क्लासेज, एक में 25 छात्र
जहां से छात्रों ने श्रीधर यूनिवर्सिटी के अलावा अलग-अलग यूनिवर्सिटी से डिग्री ली थी वहां पर एक बैच में 25 छात्र पढ़ाई करते थे। ऐसे चार बैच चलाए जाते थे, यानी हर साल लगभग 100 से ज्यादा छात्रों को पढ़ाया जाता था। इसमें से जो छात्र आगे की पढ़ाई के लिए गए, उन्हें पता चला कि उनकी डिग्री फर्जी है। आने वाले छात्र कहां पर हंै इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

ठगी की क्लास: छात्रों का विश्वास बना रहे इसलिए क्लास लेते थे

प्रवेश लेने वाले छात्रों का भरोसा बना रहे इसलिए हर दिन 2 घंटे क्लास चलाते थे। इस तरह 3 वर्षों में उन्हें डिग्री दी। संचालक राजस्थान की श्रीधर यूनिवर्सिटी, यूपी की मोनाड यूनिवर्सिटी, ग्लोबल यूनिवर्सिटी के अलावा देश के कई राज्यों की अलग-अलग यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पढ़ाई करवाते थे।

छात्रों का कहना है कि सेंटर पर एक साल में 200 दिन क्लास चलती थी, जिसमें लगभग 800 घंटे पढ़ाई भी करवाई थी। भरोसा बना रहे इसके लिए सेंटर पर रोज 4 घंटे की क्लास होती थी। किताबे भी दीं। इसके अलावा प्रोविजनल मार्कशीट की फीस भी ली। उसी के आधार पर वीएनएसजीयू यूनिवर्सिटी ने प्रवेश दे दिया।

छात्रों को दी गई डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट

सूरत से डिग्री ले सौराष्ट्र विवि से कर ली एलएलबी, पकड़े गए
एक अन्य युवा आशीष दिओरा ने बताया कि सरथाणा स्थित कृष्णा डिस्टेंस एजुकेशन में प्रवेश लिया था। जहां 3 वर्ष तक पढ़ाया गया और 2014-15 में ग्रेजुएशन की डिग्री दी गई। इसके बाद सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी में एलएलबी करने के लिए प्रवेश लिया।

लेकिन, जब सनद लेने के लिए बार काउंसिल में आवेदन किया तो बार काउंसिल ने उनकी ग्रेजुएशन की डिग्री को फर्जी बताते हुए उन पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करवा दिया। आशीष के मुताबिक शहर में बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जिन्होंने इस तरीके से ग्रेजुएशन पूरा किया है।

यूनिवर्सिटी से भी की गई है पूछताछ
यूनिवर्सिटी में डेप्युटी रजिस्ट्रार और प्रवेश प्रक्रिया के इंचार्ज प्रकाश बचरवाला ने बताया कि पुलिस की तरफ से पूछताछ की गई है, जिनको यूनिवर्सिटी का जवाब सौंप दिया है। यूनिवर्सिटी में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि डिग्री का तत्काल वेरिफिकेशन किया जा सके। यहां तक दूसरे बोर्ड से आने वाले छात्रों का भी वेरिफिकेशन नहीं हो पाता।

छात्रों का कहना है...
फर्जी डिग्री में फंसे युवाओं का कहना है कि 12वीं पास करने के बाद ग्रेजुएशन करना था, लेकिन नौकरी की भी जरूरत थी। तभी किसी ने बताया कि अडाजण स्थित एलपी सवाणी के ग्रीन प्लाजा कॉम्प्लेक्स में अक्षर एजुकेशन के नामक संस्था ग्रेजुएशन कोर्स कराती है।

हम भी वहां गए। पूछताछ की तो राहुल चौधरी और भावेश पटेल नामक व्यक्ति ने उन्हें पास करवाने की गारंटी दिया, जिसके बाद उन्होंने वहां प्रवेश ले लिया। अब दोनों सेंटर बंद करके फरार हैं।



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अडाजण स्थित वो एजुकेशन सेंटर जहां छात्रों को ठगा गया।


Source From
RACHNA SAROVAR
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