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कपड़ा व्यापारियों की बरसों पुरानी मांग पर स्मृति का जवाब- आप तो पहले से एमएसएमई में हो

सीटेक्स-2021 का उद्धघाटन करने आई केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के सामने व्यापारियों ने मर्चेंट मैन्युफैक्चरर, होलसेलर और ट्रेडर्स को एमएसएमई (माइक्रो, स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) में शामिल करने की मांग दोहराई। इस पर स्मृति ईरानी ने कहा कि आप तो पहले से ही एमएसएमई में हो। अगर कोई समस्या है तो वाणिज्य मंत्रालय से कहकर उसे दूर कराएंगी।

मर्चेंट मैन्युफैक्चरर, होलसेलर और ट्रेडर्स को एमएसएमई का लाभ देने की मांग कपड़ा व्यापारी लगातार करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें एमएसएमई की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। सूरत मरकेंटाइल एसोसिएशन (एसएमए) ने कहा कि एमएसएमई के अंतर्गत आने वाली सरकारी योजनाओं की जानकारी हर छोटे-बड़े व्यापारी को मिलनी चाहिए।

इसके लिए सरकार को जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। फोस्टा के सेक्रेटरी चंपालाल बोथरा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के चलते केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की थी, इसमें लागत से 20 फीसदी तक की बैंक सहायता, कम ब्याज पर लोन का लाभ कपड़ा व्यापारियों को नहीं मिला। सरकार मर्चेंट मैन्युफैक्चरर को भी इसमें शामिल करे।

3 वर्ष में तकनीकी वस्त्रों के लिए 2007 एचएसएन कोड घोषित किया
कोरोना के चलते अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं बंद हो गई थीं। उस समय हमारे पास एक भी मास्क या पीपीई किट निर्माता नहीं था। आज 11,000 कंपनियां हैं। इसका टर्नओवर 1100 करोड़ रुपए है। एन-95 मास्क बनाने वाली 250 कंपनियां हैं, जो हर दिन 6 लाख मास्क तैयार कर रही हैं। इसके अलावा 3 वर्षों में तकनीकी वस्त्रों के लिए 2007 एचएसएन कोड और 300 स्टैंडर्ड घोषित किया है। इससे निर्यात में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

डायमंड बुर्स की तरह टेक्सटाइल को भी मिले व्यापारिक केंद्र
चैंबर के अध्यक्ष दिनेश नवाडिया ने स्मृति ईरानी से कहा कि हीरा बुर्स बनने के बाद 1.58 लाख करोड़ रुपए का डायमंड कारोबार 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। सूरत के कपड़ा उद्योग को भी हीरा बुर्स जैसा व्यापारिक केंद्र मिलना चाहिए। सूरत के उद्योगपतियों को 500-1000 डाॅलर के ऑर्डर मिलते हैं। उस पर सीमा शुल्क दोगुना कर दिया जाता है। सैंपलिंग के लिए भेजने वाले कपड़े भी महंगे हो रहे हैं।

टेक्निकल टेक्सटाइल भविष्य की सनराइज इंडस्ट्री है
स्मृति ने सीटेक्ट-2021 के उद्घाटन माैके पर कहा कि तकनीकी वस्त्र और स्वदेशी मशीनरी टेक्सटाइल वर्ल्ड का भविष्य हैं। यह सनराइज है। हम इस प्रदर्शनी में अाए 110 प्रदर्शकों के आभारी हैं। यहां हमें मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत दिख रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने मैन मेड फाइबर और तकनीकी वस्त्रों के विकास के लिए उत्पादन लिंक प्रोत्साहन योजना के तहत 10,000 करोड़ पैकेज की घोषणा की है।

मंत्री के सामने दो संगठनों ने रखीं मांगें

फोस्टा की मांगें

1. जो होलसेलर, ट्रेडर्स दूसरी जगहों से कपड़ा बनवाते हैं उन्हें एमएसएमई का दर्जा दें और सरकारी स्कीम का लाभ दिलाएं।
2. जीएसटी के बाद टेक्सटाइल सेक्टर में एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए घटाए इंसेंटिव बढ़ाएं, क्योंकि इससे कपड़ा एक्सपोर्ट घट रहा है।
3. यूएसए-यूरोप और यूरोपियन संघ के राष्ट्रों के साथ एफटीए-पीटीए की अनुपस्थिति से एक्सपोर्ट पर 8 से 11% तक इम्पोर्ट ड्यूटी मंहगी हो जाती है। इसका समाधान करें।
4. वियतनाम, बांग्लादेश से मुक्त व्यापार की वजह से भारतीय कपड़ा एवं राॅ सिल्क का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है। इसे देखें।
5. सूरत में टेक्सटाइल गारमेंट का हब बनाने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए।
6. टेक्सटाइल क्लस्टर बनाया जाए जिससे रोजगार व उत्पादन के साथ कपड़ा उद्योग विश्व का सिरमोर स्थान प्राप्त कर सके।
7. कपड़े के घटे उत्पादन एवं रोजगार की समीक्षा कर पुन: उत्पादन एवं रोजगार बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।

एसएमए की मांगें

1. जीएसटी नियम 86ए से व्यापारियों में क्रेडिट खोने का भय है। इसमें तत्काल सुधार किया जाए।
2. सब्सिडी रुकने से व्यापारी परेशान हैं। सब्सिडी तत्काल रिलीज कराएं तो फायदा होगा।
3. एमएसएमई के लिए आने वाली सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए जागरूकता अभियान चलाएं।
4. सूरत में टेक्सटाइल यूनिवर्सिटी बनाई जाए।
5. सूरत में ट्रेडिशनल एवं हैंडीक्राफ्ट डेवलप किया जाए।
6. यहां अंतर्राष्ट्रीय मानकों वाली टेस्टिंग लैब की आवश्यकता है।



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सरसाणा कन्वेंशन सेंटर में सीटेक्स-2021 में कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी।


Source From
RACHNA SAROVAR
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