एक निजी अस्पताल के दो डाॅक्टरों के खिलाफ वराछा पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। इन डाॅक्टरों पर आरोप है कि उन्होंने मरीज के इलाज में लापरवाही बरती जिससे उसकी माैत हो गई। मृतक विरल कोराट के साले पारस वघासिया ने डॉ. महेश नावडिया और डॉ. घनश्याम पटेल के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
उन्होंने कहा कि विरल को सामान्य डेंगू था, लेकिन डाॅक्टर डेंगू हेमरेजिक फीवर का इलाज कर रहे थे। पीएम रिपोर्ट में यह बात सामने आई के विरल को हेमोरेजिक शॉक नहीं आया था और ना ही रिपोर्ट में कुछ इस तरह की बात थी। विरल को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग व किडनी की बीमारी नहीं थी। भर्ती होने के 60 घंटों में उसकी मौत हो गई। वराछा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर प्रदीप आर्य ने बताया कि दोनों आरोपी अभी पकड़ से बाहर हैं। जांच चल रही है।
पारस ने बताया कि विरल कोराट वराछा त्रिकमनगर हैप्पी बंग्लोज में रहता था। 24 जुलाई को उसकी तबीयत खराब हो गई थी। उसने कहा कि डॉ. भरत खोखानी से जांच कराई है। डेंगू निकला है। 25 जुलाई की शाम 7 बजे वह मारुति मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती हो गया। 26 जुलाई को उसने कहा कि उसकी तबीयत ठीक है। 27 जुलाई विरल के सीने में दर्द होने लगा।
सोनोग्राफी कराने पर फेफड़े तथा पेट में पानी भरा मिला। डॉक्टर ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है। डॉक्टर महेश ने कहा कि जुलाब की दवा दी है सब ठीक हो जाएगा। बाद में उसे मिर्गी आई और वह बेहोश हो गया। डॉ. महेश ने कहा कि इसकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई है। परिजन उसे दूसरे अस्पताल ले गए जहां उसे ब्रॉट डेड घोषित कर दिया गया। विरल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि उसे डेंगू फीवर था।
दोनों डॉक्टर फरार: डेंगू के मरीज ने सांस में तकलीफ बताई तो भाप दे दी
पारस ने बताया कि विरल के फेफड़े में पानी भरने के बावजूद दिन और रात में ग्लूकोज की 9 से ज्यादा बोतलें चढ़ाई गईं। इससे शरीर फूल गया था। सांस की तकलीफ में भाप दी। मिर्गी आई तो इंजेक्शन दिया। उसके बाद नींद की दवा के साथ मिडास नाम का हैवी डोज इंजेक्शन भी दिया था। उसके बाद विरल होश में आया ही नहीं। उसे स्टेरॉयड के इंजेक्शन भी दिए गए थे। डाॅक्टर ने इसे लाइफ सेविंग ड्रग्स बताया था।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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