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पाकिस्तान में जुल्म सहे; भारत आए तो भाई के ससुरालवालों ने हम बहनों को बेचने की काेशिश की, पुलिस ने कहा- चुप रहो वरना वापस भेज देंगे

जोधपुर के देचू में 11 पाक विस्थापितों की सामूहिक मौत की स्क्रिप्ट परिवार की तीनों बेटियों ने मिलकर लिखी थी। पाकिस्तान से अपना धर्म व इज्जत बचाकर जब यह परिवार भारत आया था तो सोचा था कि अब जिंदगी आसान हो जाएगी, लेकिन इतने बरस बाद भी उनकी परेशानियां दूर नहीं हुई। बड़ी बहन लक्ष्मी ने मौत से एक दिन पहले डेढ़ घंटे का वीडियो बनाया, जिसमें जुल्मों की कहानी बताई।

तीनों बहनें पढ़ी-लिखी थी और भाई के बच्चों को भी पढ़ाना चाहती थी। लेकिन पारिवारिक कलह में उनका भविष्य भी बन नहीं पा रहा था क्योंकि उन्हें स्कूल भेजने से डरते थे। बच्चों की कस्टडी को लेकर तो विवाद था ही, उनके अपहरण की आशंका भी हर वक्त लगी रहती थी।

जिसके पास मदद के लिए गए उसी ने प्रताड़ित किया, किसी सरकार ने भी नहीं सुनी

मैं लक्ष्मी, जाति भील। पिता बुद्धाराम। रहने वाले भारत के ही लेकिन कर्मों के कारण पाकिस्तान पहुंच गए। वहां से अपनी जिंदगियां बचाने के लिए 2015 में जोधपुर आ गए। आंगणवा की बस्ती में आशियाना बसाया। भाइयों के ससुराल पक्ष और अपने भी इसी बस्ती में रहते थे, तो उम्मीद थी कि अपनों के बीच जिंदगी अब आसानी से जी सकेंगे। मेरी जिंदगी की कहानी संगीन है। इसे मैंने अपनी डायरी में लिखा। अब इतना समय नहीं है कि पूरी डायरी पढ़कर बता सकूं।

शॉर्ट वीडियो में जिंदगी की कहानी बताना चाहती हूं। सीधे-साधे व नेक इंसान की बेटी हूं। पाकिस्तान में सभी लोग गलत नहीं हैं, लेकिन वहां भी कुछ ऐसी कंपनियां हैं, ये खतरनाक कंपनियां अच्छे लोगों के पीछे पड़ जाती हैं। जब छोटी थी, तभी से ये कंपनियां मेरे पीछे लग गई थी। बहुत दु:ख दिए। हम मौत के मुंह से बचकर आ गए। दो साल पहले मेरी एक छोटी बहन ने यातनाओं के कारण 2017 में यहां दम तोड़ दिया।

जैसे-तैसे जोधपुर पहुंचे थे और पहले ही दिन से भाई के ससुराल पक्ष ने हमले और अत्याचार शुरू कर दिए। रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम लिखवाए हैं, उन्होंने भगत की कोठी से ही हम बहनों को गायब करवाने की कोशिश की। शादी व रिश्तों के बहाने अपनापन दिखाकर इन लोगाें ने हम बहनों को बेचने की कोशिश की। जब जोधपुर आ गए थे तो पाकिस्तान में भाई को गिरफ्तार करवा दिया था। इनका मकसद हमें बेचना ही था, बर्बाद करना था।

प्रताड़ना की जानकारी हमने हमारे गारंटर सुनील को बताई तो उन्होंने भी चुप रहने की हिदायत दी। मंडोर पुलिस से मदद मांगी तो पुलिस ने भी हमें ही डांटा। कहते, यहां लड़ने आए हो। यहां से भागकर ट्यूबवेल पर रहने लगे। वहां भी उनके लोग पहुंच गए। हद पार परेशान करने लगे। -जैसा भास्कर को बताया।

भाभी धांधली ने ननद की डिग्रियां जला दी, धमकाया- अब नौकरी करके बताओ... सदमे में एक बहन की मौत
वर्ष 2018 में केवलराम का अपनी पत्नी धांधली से समझौता हुआ तो वह साथ रहने आ गई। फिर एक दिन दोनों में फिर झगड़ा हुआ तो धांधली ने गुस्से में छपरे में आग लगा दी। जिसमें लक्ष्मी, प्रिया व एक अन्य बहन नजीरों की डिग्री व शैक्षणिक दस्तावेज जल गए। तब धांधली ने यह भी कहा कि अब नौकरी करके दिखाओ...। हुआ भी ऐसा ही नर्सिंग कर चुकी लक्ष्मी कहीं नौकरी नहीं कर सकी। रिश्तेदार मलका ने बताया कि कुछ दिन बाद धांधली व चेतन भील ने धमकाया कि अब दस्तावेज जल गए हैं, पुलिस को पकड़ा देंगे। इससे नजीरों सदमे में आ गई और कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई।



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परिवार में इकलौता बचा शख्स केवलराम।


Source From
RACHNA SAROVAR
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