नवसारी के मूक बधिर प्रमोद का सिविल अस्पताल में गुलियन बैरे सिंड्रोम और कोरोना पॉजिटिव दोनों बीमारियों से निदान हुआ। 14 दिन के इलाज के बाद वह पूरी तरह ठीक हो गए है। डॉक्टरों ने बताया कि यह पहला मौका है जब गुलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) वाले कोरोना पॉजिटिव मरीज का इलाज हुआ है। प्रमोद को आईवीआईजी इंजेक्शन से इसका इलाज किया गया है।
नवसारी के आट गाम निवासी 47 वर्षीय प्रमोद भाई पटेल जन्म से मूकबधिर हैं। दो माह पहले हाथ व पैर बेजान होना, सिहरन, अंगुलियों में सुई जैसी चुभन, दर्द जैसी समस्याएं शुरू हुईं। 5 सितंबर को एक निजी अस्पताल गए। डॉक्टरों ने कहा कि गुलियन सिंड्रोम हो गया है। बाद में उन्हें नवसारी के सिविल भेज दिया गया।
सिविल अस्पताल में कोरोना टेस्ट हुआ वह पॉजिटिव पाए गए। के डॉ. अर्पित पटेल ने बताया कि प्रमोद चलने में भी असमर्थ था। हमने आईवीआईजी इंजेक्शन से इलाज शुरू किया। इस दौरान कोरोना का भी इलाज चलता रहा। डॉ. कुलदीप श्रीमाड़ी ने बताया कि गुलियन सिंड्रोम का इलाज तीन तरह से किया जाता है, जिसमें एक प्लाज्मा फेरेसिस, दूसरा आईवीआईजी इंजेक्शन और तीसरा फिजियोथैरेपी है। इस बीमारी में मशल्स कमजोर हो जाती हैं। 23 सितंबर को प्रमोद को अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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