कृषि उपज मंडी में व्यापारियों को लगने वाला मंडी शुल्क शासन ने 1.70 रु. से घटाकर 50 पैसे प्रति सैकड़ा कर दिया। व्यापारियों द्वारा खरीदी गई उपज के दाम पर प्रति सैकड़ा 1.20 रु. टैक्स कम हो जाने से मंडी शुल्क एक चौथाई रह गया। मंडी समिति को प्रतिदिन 6 लाख रु. की आय शुल्क से होती थी वह अब 1.50 लाख रु. पर पहुंच गई।
मॉडल एक्ट के विरोध को लेकर मंडी के अधिकारी-कर्मचारियों की हड़ताल तो खत्म हो गई लेकिन प्रदेशभर की मंडियों के बंद होने का भय कर्मचारियों में अभी भी बना हुआ है। क्योंकि जो 1.70 रु. मंडी शुल्क मंडी समितियों को मिलता था उसी शुल्क से सड़क निधि, बोर्ड शुल्क, मंडी शुल्क के साथ ही कर्मचारियों का वेतन निकलता था, अब शुल्क घट जाने से बड़ी मंडियों में वेतन के भी लाले पड़ जाएंगे। खंडवा कृषि उपज मंडी के भी यही हाल हैं। प्रतिदिन 6 हजार क्विंटल तक की आवक पर जहां समिति को मंडी शुल्क के 6 लाख रु. की आय होती थी वह अब घटकर 1.50 लाख रु. पर पहुंच गई।
50 पैसे सड़क निधि, बोर्ड को जाता है 30 पैसे शुल्क - मंडी समिति पूर्व में व्यापारियों से जो 1.70 रु. मंडी शुल्क का लेती थी उसमें 50 पैसे सड़क निधि, 30 पैसे मंडी बोर्ड को व बचे 90 पैसे कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य मदों पर खर्च होते थे। अब शुल्क 50 पैसे कर देने से कर्मचारियों का वेतन निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
राहत... मंडी शुल्क कम होने से व्यापारी और किसान को फायदा
मंडी शुल्क कम हो जाने से व्यापारियों के साथ-साथ किसानों को भी फायदा हुआ है। मंडी में ही नीलामी व खरीदी हाेने से व्यापारी चाहे जितनी उपज बोली लगाकर खरीद सकता है, उसे मंडी शुल्क भी कम देना पड़ेगा। किसान को भी नीलामी में अपनी उपज के बेहतर दाम मिलेंगे, इससे वह अन्य किसानों की तरह संतुष्ट रहेगा। उसे मंडी में ही भुगतान भी हो जाएगा।
चिंता... शुल्क कम होने से इस तरह होगा मंडी समिति को नुकसान
बुधवार को कृषि उपज मंडी में 2 हजार क्विंटल साेयाबीन की आवक हुई। 3 हजार रु. प्रति क्विंटल के मान से 60 लाख रु. का सोयाबीन व्यापारियों ने खरीदा, इस पर प्रति सैकड़ा 1.70 के हिसाब से 80 हजार रु मंडी शुल्क होता है, अब अगर 50 पैसे से गणना करते हैं तो हर दिन मंडी को 30 हजार रु. ही मंडी शुल्क मिलता है।
आर्थिक बोझ... अच्छी आवक तो भी मंडी बंद होने का भय
मंडी प्रभारी नारायण दशोरे ने बताया मंडी में उपज की अच्छी आवक भी होती है तो भी एक दिन में 1 लाख रु. तक मंडी शुल्क मिलेगा। पूरे महीने में मंडी शुल्क 30 लाख रु. आएगा। इसमें 25 लाख रु. तो 70 कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जाएगा। 5 लाख रु. में बिजली बिल, मेंटेनेंस कैसे होगा।
इधर, हरसूद कृषि उपज मंडी में सोयाबीन 3680 रुपए तक बिका, गेहूं में मंदी
13 दिनों बाद शुरू हुई नीलामी, पहले दिन 1050 क्विंटल की आवक, उड़द में उछाल
सकल व्यापारी संघ व मंडी कर्मचारी संगठन की अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त होने के बाद बुधवार को कृषि उपज मंडी में नीलामी व खरीदी शुरू हुई। 13 दिनों बाद मंडी में एक बार फिर रौनक नजर आईं। हालाकि पहले दिन विभिन्न उपज की आवक 1265 क्विंटल की रही। सोयाबीन व उड़द के भाव में सुधार होने से किसानों को राहत भी मिली। लंबे समय बाद मंडी खुलने पर पहले दिन सोयाबीन 1050, गेहूं 100 तथा उड़द की आवक मात्र 15 क्विंटल हुई। सकल व्यापारी संघ की मांगे प्रदेश सरकार द्वारा मंजूर करने तथा मंडी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा को नवंबर तक समस्या समाधान के बाद हड़ताल समाप्त हुई है।
हड़ताल के बाद मंडी में सोयाबीन-उड़द में सुधार, गेहूं में मंदी
बुधवार को मंडी में व्यापारियों द्वारा करीब 12.30 बजे नीलामी शुरू की गई। शाम 5 बजे तक खरीदी पूरी हो गई। जिसमें हड़ताल के दौरान बाहरी खरीदी में बिक रही सोयाबीन 2500-3000 भाव रहा। वहीं सोयाबीन 2700-3680 क्विंटल नीलाम हुई। इसी तरह उड़द का दाम हड़ताल में 3280-4100 थी जो बढ़कर 4300-5922 पहुंच गई। वहीं गेहूं का अधिकतम भाव 1540 रुपए क्विंटल रहा।
अनुज्ञा पत्र की व्यवस्था से समय व आर्थिक लाभ -व्यापारी संघ
मंडी एक्ट में बाहरी खरीदी को फ्री हैंड के बाद सकल व्यापारियों ने मंडी शुल्क घटाने के साथ अनुज्ञा पत्र व्यवस्था समाप्त लिए जाने को मांग को लेकर हड़ताल की। शासन की घोषणा के बाद व्यापारियों में उत्साह नजर आया। व्यापारी संघ के पंकज बंसल व गौरव सिंह गेहलोद ने बताया कि सीएम चौहान की घोषणा से अनाज, तिलहन व अन्य मंडी के लाइसेंसी व्यापारी को समय के साथ आर्थिक बचत भी होगी।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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