(लवकुश मिश्रा) 200 से अधिक डायमंड कारोबारी मुंबई से सूरत शिफ्ट हो गए हैं। अभी और भी शिफ्ट हो रहे हैं। यहां डायमंड बुर्स का निर्माण आखिरी चरण में है। इसकी वजह से और भी डायमंड ट्रेडर्स सूरत की ओर रुख कर रहे हैं। मुंबई से सूरत आने वाले डायमंड कारोबारी वराछा में अपना नया आशियाना बना रहे हैं, लेकिन यहां उन्हें गैस कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है।
वराछा में 80 इमारतों के 5000 से अधिक फ्लैट में अन्य मूलभूत सुविधाएं तो मिल रही हैं, लेकिन डेढ़ साल से गुजरात गैस लिमिटेड गैस का कनेक्शन नहीं दे रही है। इन इमारतों के बिल्डरों का कहना है कि कुछ ने गैस कनेक्शन के लिए लगने वाली फीस भर दी है, कुछ देने को तैयार हैं फिर भी कंपनी कनेक्शन देने में आनाकानी कर रही है। कंपनी का कहना है कि इन इमारतों को जो कनेक्शन देना है वह विशेष प्रकार का है।
इसके लिए स्पेशलिस्ट कारीगर चाहिए। कोरोना की वजह से कारीगर गांव चले गए थे, इसलिए कनेक्शन देने में देरी हो रही है। सूरत में स्थित अधिकतर डायमंड कंपनियों की कॉर्पोरेट ऑफिस मुंबई (बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स) में है। मुंबई में बोरीवली, मलाड, गोरेगांव, दहिसर जैसे क्षेत्रों में इन डायमंड कंपनियों की यूनिटें हैं।
सूरत डायमंड बुर्स के निर्माण के साथ एयरपोर्ट को मिले अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के दर्जे के कारण अब ये डायमंड कंपनियां मुंबई से कारोबार समेटकर सूरत आ रही हैं। डायमंड कंपनियों का स्थानांतरण दो वर्ष पहले से ही शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में कारोबारी यहां आ गए हैं और फ्लैट भी बुक करा लिया है, लेकिन गैस कनेक्शन अभी तक नहीं मिला है।
गुजरात गैस: इन इमारतों का बेसमेंट की गहराई ज्यादा, विशेष प्रकार की स्टील की पाइप लाइन डालनी पड़ेगी
गुजरात गैस लिमिटेड के सबसे वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ऐसी इमारतों के बेसमेंट में सामान्यतः बी पाॅलिथलिन नेटवर्क पाइप लाइन का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन वराछा की इन इमारतों के बेसमेंट की गहराई ज्यादा है। इसके लिए हमें स्पेशलाइज्ड पाइप लाइन नेटवर्क डालना पड़ेगा। यह काम हमारे स्पेशलिस्ट कारीगर करते हैं, जिन्हें अलग से ट्रेनिंग दी जाती है।
कोरोना और लॉकडाउन की वजह से ये कारीगर गांव चले गए थे। अब ये आ चुके हैं। अब इन इमारतों का गैस कनेक्शन संबंधी काम नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करेंगे। इन इमारतों का स्ट्रक्चर हैवी है, इसलिए सुरक्षा के मद्देनजर बेसमेंट जो पाइप लाइन डाली जाएगी वो स्टील की होगी। यह ज्यादा सुरक्षित होती है। पॉलिथलीन पाइप लाइन हैवी इमारती स्ट्रक्चर के लिए सेफ नहीं मानी जाती है।
5000 फ्लैट ऐसे जहां गैस कनेक्शन नहीं
मौजूदा समय में लगभग 40 इमारती प्रोजेक्ट हैं, जिनमें कुल 80 इमारतें हैं। इनमे लगभग पांच हजार फ्लैट हैं, जिनमें अभी भी गुजरात गैस कनेक्शन नहीं दे रही है। प्रत्येक इमारत में डायमंड ट्रेडर्स ने फ्लैट बुक करा कर रखा है। हर बिल्डिंग में 8 से 10 फ्लैट में मुंबई से सूरत शिफ्ट हुए कारोबारी हैं। ये सभी गैस कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं।
अधिकारी कह रहे... 45 मीटर ऊंची इमारतों में गैस का प्रेशर नहीं बनता, सवाल- वेसू में कैसे कर रहे सप्लाई
बिल्डरों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर उनके और गुजरात गैस के अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई थी, जिसमें बताया गया कि अभी तक कॉन्ट्रैक्टर फाइनल नहीं हुए हैं। दूसरी समस्या यह बताई कि 14 मंजिला की नई 45 मीटर ऊंची इमारतों में गैस सप्लाई के लिए रोड से होकर आने वाली मेन लाइन पीवीसी की होती है।
जबकि जो पाइप कैंपस में आती है वो जीआई की होती है। जीआई और पीवीसी में गैस सप्लाई के लिए जो प्रेशर बनना चाहिए वो बन नहीं पा रहा है। यही समस्या एक साल से बता रहे हैं, जबकि वेसू में कई 18 मंजिला इमारतें हैं, वहां तो ये समस्याएं नहीं आ रही हैं। गुजरात गैस के अधिकारी कहते हैं कि हमारे पास अभी प्लानिंग नहीं है। वराछा में 14 मंजिला इमारत में गैस कनेक्शन देने के लिए अधिकारी कहते हैं कि अभी इसके लिए हम प्लान करेंगे।
बहाना: अधिकारी पहले कह रहे थे मानसून है, अब फीस देने पर भी नहीं ले रहे
वराछा के एक बड़े बिल्डर ने बताया, मैंने पिछले साल दिसंबर से आवेदन किया है, लेकिन गुजरात गैस के अधिकारी बहाना बनाकर टालते आ रहे हैं। कुछ महीने पहले उन्होंने कहा था कि अभी मानसून चल रहा है, इसलिए कनेक्शन नहीं दे पाएंगे। सितंबर के पहले सप्ताह में हमने फिर संपर्क किया और कहा कि मानसून खत्म हो रहा है अब तो कनेक्शन दे दो।
इस पर गुजरात गैस के अधिकारी फीस लेने से मना कर रहे हैं, क्योंकि नियमानुसार अगर फीस ले ली तो 90 दिन के भीतर कनेक्शन देना अनिवार्य है। अधिकारियों के रवैये से अभी भी तय नहीं है कि गैस का कनेक्शन कब तक मिलेगा।
समस्या: गैस कनेक्शन नहीं मिलने से एसएमसी से बीयूसी भी नहीं मिल रहा
बिल्डरों के समूह ने बताया कि गैस कनेक्शन के लिए इसी साल जुलाई में 9 लाख रुपए जमा किए थे और 110 फ्लैट के लिए गैस कनेक्शन की मांग की थी। गुजरात गैस अथॉरिटी के नियमानुसार पेमेंट भरने के 90 दिन के भीतर कनेक्शन दिया जाना अनिवार्य है, लेकिन यहां नहीं हो रहा है।
वराछा के लगभग 40 बिल्डर दो महीने पहले गुजरात गैस कंपनी के कार्यालय के बाहर खड़े रहे, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। काफी अाग्रह के बाद गुजरात गैस कंपनी का एक अधिकारी बाहर आया और उसने बिल्डरों के साथ बैठक की।
बिल्डरों ने उससे कहा कि गैस कनेक्शन नहीं मिलने से दिक्कत यह है कि प्रोजेक्ट को हम फिनिशिंग लेवल तक नहीं ले जा पा रहे हैं, क्योंकि हमें आरसीसी करना है। पेवर ब्लॉक लगाना है, लेकिन नहीं कर पा रहे हैं। इससे एसएमसी का बीयूसी भी नहीं मिल पा रही है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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