काेराेनाकाल में राज्य सरकार ने राहत देते हुए स्वनिर्भर स्कूलों में 25 प्रतिशत फीस माफ करने का आदेश दिया है। अभिभावकों ने विरोध करते हुए सरकार ने 50 प्रतिशत फीस माफ करने की मांग की है। वहीं, अब फीस को लेकर एक और विवाद सामने आया है।
सरकार के फीस माफी आदेश के बाद स्वनिर्भर स्कूल संचालकों ने निर्णय लिया है कि पिछले साल की बकाया और इस साल की जून से अक्टूबर तक की फीस जमा करने के बाद ही 25 प्रतिशत माफ करेंगे। इससे अभिभावकों की परेशानी और बढ़ गई है। एफआरसी के अमल में आने और लॉकडाउन के बाद अभिभावकों ने कई महीने की फीस बाकी रखी है। अभिभावकों को 25 प्रतिशत छूट का फायदा लेना है तो पुरानी बकाया फीस देनी होगी।
31 अक्टूबर तक फीस न भरने पर छूट नहीं दी जाएगी
स्वनिर्भर शाला संचालक मंडल ने कहा है कि राज्य सरकार ने ट्यूशन फीस 25 प्रतिशत माफ करने का आदेश दिया है। इसका लाभ लेने के लिए अभिभावकों को कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होगा। अभिभावकों को पिछले साल की बकाया और इस साल की जून से अक्टूबर महीने तक की पूरी फीस जमा करनी होगी।
इसके बाद ही हम 25 प्रतिशत फीस माफ करेंगे, जो आने वाले महीनों में लागू होगा। 31 अक्टूबर तक फीस नहीं भरने वाले अभिभावकों को 25 प्रतिशत की छूट नहीं दी जाएगी। इसकी जिम्मेदारी उनकी होगी। स्कूल संचालकों का कहना है कि भारी संख्या में अभिभावकों ने पिछले साल की भी फीस नहीं जमा की है। पिछले साल की फीस नहीं भरने वाले अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है।
सरकार के साथ बैठक में इसे स्पष्ट कर दिया था
^राज्य सरकार के साथ हुई बैठक में 31 अक्टूबर तक पूरी फीस जमा करने के बाद ही 25 प्रतिशत माफ करने के मुद्दे पर हम सहमत हुए हैं। राज्य सरकार को भी इसे स्पष्ट कर देना चाहिए, ताकि अभिभावकों के मन में कोई संशय न रह जाए। हालांकि सरकार ने अभी तक इसे स्पष्ट नहीं किया है। इससे अभिभावक परेशान हैं। 31 अक्टूबर तक फीस भरने वालों को ही 25 प्रतिशत फीस माफी का लाभ दिया जाएगा।
-दीपक राजगुरु, प्रवक्ता, स्वनिर्भर स्कूल संचालक मंडल
सरकार की ओर से ऐसा कोई आदेश नहीं आया
^स्कूलों की ओर से फीस जमा करने की तारीख भी निर्धारित कर दी गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि अभिभावकों को ब्लैकमेल किया जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई भी आदेश नहीं आया है, जिसमें ये कहा गया हो कि 31 अक्टूबर तक पूरी फीस जमा करना जरूरी है। सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी होने के बाद ही पूरा मामला स्पष्ट होगा। अभिभावक स्कूलों की बात मानने को कतई तैयार नहीं हैं।
-उमेश पांचाल, प्रवक्ता, अभिभावक मंडल, सूरत
अभिभावकों का आरोप: आरटीई में प्रवेश लेने वाले छात्रों से स्कूल वसूल रहे पैसे, स्कूल का जवाबः सरकार 10 हजार ही देती है, इससे ज्यादा खर्च होता है
राज्य सरकार के आदेशानुसार शहर के निजी स्कूलों में आरटीई के तहत गरीब बच्चाें काे प्रवेश देने की प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच अभिभावकों ने स्कूलों पर फीस वसूलने का आरोप लगाया है। अभिभावकों का कहना है कि आरटीई के तहत प्रवेश नि:शुल्क होने के बावजूद स्कूलों में अलग-अलग चार्ज के बहाने रुपए वसूले जा रहे हैं।
रुपए जमा न करने पर स्कूल बच्चों को प्रवेश देने से साफ इनकार कर रहे हैं। आरटीई में प्रवेश का पहला राउंड पूरा हो चुका है। दूसरे राउंड में प्रवेश की तैयारी चल रही है। शिक्षाधिकारी ने कड़े नियम नहीं बताए तो हजारों बच्चे प्रवेश से वंचित रह जाएंगे।
अभिभावक मंडल की ओर से इसको लेकर शिक्षाधिकारी से शिकायत की गई है। अभिभावक मंडल के सदस्य उमेश पांचाल ने शिक्षाधिकारी को ई-मेल करके बताया कि बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। स्कूलों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से उन्हें केवल 10 हजार रुपए ही मिलते हैं।
जबकि एक बच्चों को पढ़ाने में इससे ज्यादा खर्च होता है। 10 हजार के अलावा होने वाले खर्च को अभिभावक भरेंगे तो ही प्रवेश दिया जाएगा। उमेश पांचाल ने शिक्षाधिकारी से उनकी शिकायत को शिक्षामंत्री तक पहुंचाने की मांग की है।
प्रवेश प्रक्रिया का पहला राउंड पूरा, 6000 छात्र अभी भी प्रवेश से वंचित
राइट टू एजुकेशन के तहत प्रवेश प्रक्रिया का पहला राउंड 30 सितंबर को पूरा हो गया। छात्रों को प्रवेश कन्फर्म कराने के लिए 3 दिन का समय दिया गया था। पहले राउंड में 9000 छात्रों को प्रवेश दिया गया, अभी 6000 छात्र वंचित हैं। प्रवेश से वंचित छात्र दूसरे राउंड का इंतजार कर रहे हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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