header ads

रोज कमाने वाले तो समझ गए, तफरीह करने वाले कब समझेंगे? लापरवाहियों से लगातार बढ़ते केस

पेट की आग बुझाने के लिए कोरोना काल में भी लोगों को घर से काम के लिए बाहर निकलना पड़ रहा है। रोज कमाकर खाने वाले लोग तो समझ गए हैं कि अभी मास्क ही वैक्सीन है। इसलिए वे काम करने के दौरान कोरोना से बचाव के लिए हमेशा मास्क पहने रहते हैं।

आजकल गैरेज वाला, चायवाला, रोड किनारे फुटकर सामान बेचने वाले, पानी- पूरी वाले, नारियल बेचने वाले या सब्जी बेचने वाले मास्क पहनकर काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं। शायद इन्हें कोरोना की गंभीरता का अंदाजा हो गया है, लेकिन बहुत से लोग सड़कों में पर बिना मास्क के तफरीह करते रहते हैं।

प्रशासन के बार-बार कहने के बाद भी ये मास्क पहनना जरूरी नहीं समझ रहे हैं। ऐसे लापरवाहियों से केस बढ़ रहे हैं।उत्तर प्रदेश से आकर यहां सूरत में गुजारा कर रहीं माया देवी सुबह 4 बजे से नारियल बेचती हैं। लॉकडाउन में धंधा ठप हो गया था।

अब कुछ दिनों से धंधा फिर से शुरू हुआ है। फिर से लॉकडाउन की स्थिति न बने और परिवार के सदस्यं में भी कोरोना का संक्रमण न फैले, इसलिए लगातार मास्क पहने रहती हूं।रिंगरोड के निकट जीतू आकरी गैरेज चलाते हैं। उनके काम में मेहनत होती है, पसीना भी आता है, लेकिन जीतू आकरी गर्मी में भी मास्क पहनकर काम करते हैं। गैरेज पर कई लोग बिना मास्क के आते हैं तो उनको वह मास्क पहनने के लिए समझाते हैं।


मास्क न पहनने वालों को समझाते हैं मैकेनिक जीतू आकरी

हमेशा मास्क पहनकर ही चाय बनाते हैं मुकेशभाई महाजन

घूम-घूम कर खिलौने बेचने वाला भी मास्क को लेकर जागरूक


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
सुबह 4 बजे से मास्क पहनकर नारियल बेचती हैं मायादेवी


Source From
RACHNA SAROVAR
CLICK HERE TO JOIN TELEGRAM FOR LATEST NEWS

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget