कोरोना महामारी के चलते इस साल गोहद नगर के बैंड और डीजे संचालकों को आर्थिक रूप से काफी नुकसान हुआ है। लॉकडाउन के दौरान नगर में धार्मिक और वैवाहिक आयोजन नहीं हुए, लेकिन अनलॉक में धार्मिक और वैवाहिक समारोह तो हुए लेकिन शासन की गाइड लाइन के अनुरूप बिना बैंड और डीजे के आयोजित हुए। ऐसे में इन व्यापारियों के पास जो ऑर्डर थे वे भी कैंसिल हो गए। इस कारण से पिछले साढ़े छह महीने से नगर के बैंड और डीजे संचालकों को काम नहीं मिलने से वे हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।
काम नहीं मिलने के कारण कुछ बैंड-बाजे और डीजे संचालक परिवार के भरण-पोषण के लिए बाजार में मजदूरी करने के साथ मटके और सब्जी बेचने का काम शुरू कर दिया है। मंगलवार को नगर के बैंड और डीजे संचालकों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि चार पैसे कमाने के लिए हमारे ऊपर लगी रोक को हटाया जाए।
सब खुल रहा लेकिन हम पर रोक क्याें
मंगलवार को सामूहिक रूप से प्रशासन से छूट देने की मांग करते हुए बैंड और डीजे संचालक पवन बादल, हबीब खान, जाकिर खान, धनसिंह बाथम,वकील पाल आदि का कहना था कि कोरोना काल में जब सरकार द्वारा बाजार, कॉलेज, स्कूल खोल दिए गए हैं, तो हम लोगों को छूट क्यों नहीं दी जा रही है। रोक लगी होने से हम लोग पिछले साढे छह महीने से बेरोजगार बैठे हुए हैं। हमारे पास जो जमा पूंजी थी वे भी अब खर्च हो चुकी है। यही हाल रहा तो भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। कुछ लोग पेट पालने के लिए दूसरे काम कर रहे हैं।
राजनीतिक सभा के लिए रोक नहीं, गरीबों के लिए शासन के नियम लागू
डीजे और बैंड संचालक प्रेम, साकिर खान ने बताया कि नगर में 25 बैंड और 50 से अधिक डीजे संचालित हैं। एक बैंड पर 30 से 35 लोग काम करते हैं। वहीं एक डीजे पर 7 से 10 लोग काम करते हैं। कुल मिलाकर पिछले साढे छह महीने से एक हजार से अधिक लोग बेरोजगार बैठे हुए हैं। डीजे संचालक प्रेम ने कहा कि उपचुनाव होने जा रहा है। आए दिन राजनेताओं की सभाएं हो रही हैं। जिनमें सैकड़ों लोग एकत्रित हो रहे हैं। लेकिन शासन इस पर रोक नहीं लगा रही है। जिसे देखकर लगता है कि शासन के सभी नियम हम गरीबों के लिए हैं।
डीजे का सामान बेचकर नहीं चुका सकूंगा कर्ज, मर जाएं क्या?
डीजे संचालक जाकिर खान ने बताया कि मैंने 25मार्च से पहले कर्ज निकालकर रोजगार के लिए डीजे खोला था, लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद मैंने अभी तक एक भी कार्यक्रम नहीं किया है। वहीं पिछले साढे छह महीने में ब्याज सहित कर्ज की रकम दुगनी हो चुकी है, अगर मैं दुकान का पूरा सामान भी बेच दूं तो कर्ज नहीं चुका सकूंगा। कर्ज की सोचकर कभी-कभी लगता है कि फांसी लगा लूं। इसी क्रम में पवन बादल ने कहा कि अगर दिवाली से पहले रोक नहीं हटी तो हम लोग पूरी तरह से कर्ज में डूब जाएंगे।
पेट भरने के लिए मटके और खिलौने बेच रहे हैं बैंड संचालक
बैंड संचालक हबीब खान और समीर ने बताया कि हम लोग दिव्यांग हैं। हमारो कारोबार बंद होने से हम अन्य कोई काम नहीं कर सकते। शासन को बैंड-बाजों और डीजे वालों के ऊपर से रोक हटा लेना चाहिए। डीजे संचालक प्रेम ने बताया कि मेरे पास जो जमा पूंजी भी वह खत्म हो गई। कारोबार बंद होने से घर के आर्थिक हालात खराब हो गए थे, ऐसे में परिवार के भरण-पोषण के लिए मुझे बाजार में मजबूरी के साथ मटके बेचने पड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मेरी गुहार है कि शादियों में डीजे व बैंड बाजों के उपयोग की अनुमति प्रदान की जाए
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Source From
RACHNA SAROVAR
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