कोरोना के मामले जैसे-जैसे बढ़ रहे हैं वैसे वैसे अलग-अलग समस्याएं सामने आ रही हैं। रैपिड टेस्ट पर संदेह करने वाले डॉक्टर अब आरटीपीसीआर जांच पर भी भरोसा नहीं कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जिसमें मरीज की रैपिड और आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है, लेकिन मरीज सीटी स्कैन में पाॅजिटिव मिल रहे हैं।
डाॅक्टरों का कहना है कि अगर किसी को कोरोना के लक्षण हैं और रैपिड और आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आई है तो यह मत मान लें कि उन्हें कोरोना नहीं है। डॉक्टर की सलाह पर सीटी स्कैन जांच जरूर करवाएं, क्योंकि ऐसे कई केस आ चुके हैं जिनमें मरीजों के दोनों ही टेस्ट निगेटिव आए, लेकिन बाद में जब सीटी स्कैन जांच कराई गई तो लंग्स में 5 से 15 फीसदी तक इन्वॉल्वमेंट मिला।
इसका कारण बताते हुए एक डॉक्टर ने बताया कि यह सैंपल कलेक्शन और वायरस की स्थिति पर भी निर्भर करता है। जहां से सैंपल लिया गया है वहां वायरस होगा तो मिलेगा नहीं होगा तो नहीं मिलेगा। हालांकि कोरोना का असर 100 फीसदी लंग्स पर मिलता है।
अभी तक डॉक्टर आरटीपीसीआर जांच को ही मानते रहे हैं। इसी के आधार पर मरीज का इलाज किया जाता रहा है। कोरोना के रैपिड टेस्ट को डॉक्टर नहीं मानते। उनका कहना है कि इसकी जांच पूरी तक सटीक नहीं होती है। अब कई बार आरटीपीसीआर जांच में भी कोरोना डिटेक्ट नहीं हो रहा है। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि कभी-कभी दोनों जांच में कोरोना का पता नहीं चलता, लेकिन लक्षण दिखता है। ऐसे में सीटी स्कैन से कोरोना का पता चल जाता है।
निगेटिव रिपोर्ट आने पर भी कोरोना के लक्षण मिल रहे, इसलिए डॉक्टर करा रहे सीटी स्कैन
केस-1: आरटीपीसीआर में निगेटिव, सीटी स्कैन में 10% लंग्स इन्वॉल्वमेंट
पांडेसरा निवासी 29 वर्षीय अजय सिंह को पिछले हफ्ते बुखार सांस लेने की समस्या शुरू हुई। हेल्थ सेंटर पर रैपिड टेस्ट करवाया जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। उसे लगा सामान्य बुखार है, ठीक हो जाएगा। सोमवार को समस्या बढ़ी तो सिविल गया। लक्षण के आधार पर डॉक्टरों ने आरटीपीसीआर जांच करवाई। मंगलवार को उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इसी दौरान डॉक्टरों ने सीटी स्कैन जांच भी लिखी थी। उसकी रिपोर्ट में कोविड का 10 फीसदी लंग्स इन्वॉल्वमेंट मिला। उसे होम आईसोलेट कर दिया गया है।
केस 2: रैपिड व आरटीपीसी टेस्ट में निगेटिव, सीटी स्कैन में कोरोना मिला
कतारगाम निवासी 55 वर्षीय हसमुख भाई जागाणी डायमंड वर्कर हैं। पिछले कुछ दिनों से वह बीमार चल रहे हैं। कंपनी में उनका रैपिड टेस्ट किया गया। उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। बाद में सिविल अस्पताल में आरटीपीसीआर जांच करवाई तो उसकी रिपोर्ट भी निगेटिव आई। उनके बेटे ने एक निजी अस्पताल के डॉक्टर की सलाह पर सीटी स्कैन करवाया तो रिपोर्ट में लंग्स में 25 फीसदी इन्वॉल्वमेंट मिला। हसमुख भाई भर्ती हैं।
केस 3: फेफड़े में 15% इन्वाॅल्वमेंट, इलाज हो रहा, फिर से कराएंगे जांच
मजूरा गेट निवासी 40 वर्षीय निमेषभाई शहानी का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। परिजन उन्हें अब सिविल अस्पताल में लाना चाहते हैं। परिजनों का कहना है कि रैपिड और आरटीपीसीआर जांच करवा ली है। दोनों जांच की रिपोर्ट निगेटिव आई हैं, फिर भी सीटी स्कैन रिपोर्ट के आधार पर कोरोना वार्ड में इलाज दिया जा रहा है। सिविल अस्पताल में फिर से जांच करवाएंगे। सीटी स्कैन में 15 फीसदी लंग्स इन्वॉल्वमेंट है।
सीटी स्कैन जांच का परिणाम 100%
^अगर रैपिड के 100 सैंपल की जांच में 37% आरटीपीसीआर में 65 से 70% और सीटी स्कैन की 100% रिपोर्ट मिलती है। लक्षण वाले ऐसे मरीज मिल रहे हैं जिनकी रैपिड और आरटीपीसीआर जांच निगेटिव आ रही, हम उन्हें सीटी स्कैन को भेज रहे हैं।
-डॉ. पारुल वडगामा, सिविल अस्पताल
सैंपल कलेक्शन ठीक से नहीं होने पर भी रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है
^सैंपल कलेक्शन और वायरस की स्थिति पर निर्भर करता है। कई बार सैंपल कलेक्शन ठीक से नहीं हो पाता, इसलिए रिपोर्ट निगेटिव आती है। सीटी स्कैन में इसके कोई चांस नहीं होते। लंग्स में माइनर इन्वॉल्वमेंट भी डिटेक्ट हो जाता है। -डॉ. फेनिल मुनीम, माइक्रोबायोलॉजिस्ट
कोरोना से अब तक 26010 मरीज ठीक, 288 नए केस , 298 डिस्चार्ज, चार माैत
गुरुवार को 288 नए संक्रमित मिले। इनमें शहर के 176 और जिले के 112 मरीज है। सूरत में अब तक कोरोना के कुल 29457 केस अा चुके हैं। वहीं दूसरी ओर शहर और ग्रामीण में दो-दो यानी 4 मरीजों की इलाज के दौरान मौत हुई। अब तक 931 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें 677 शहर के और 254 ग्रामीण के थे। गुरुवार को 298 मरीज डिस्चार्ज हुए। इनमें 182 मरीज शहर के और 116 जिले के हैं। अब तक 26010 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। इसमें 19567 शहर के और 6443 जिले के हैं।
माइक्रो कंटेनमेंट जोन की रणनीति फेल... आयुक्त बोले- लोग मास्क नहीं पहन रहे इसलिए अंकुश में नहीं आ रहा है कोरोना
शहर में 2000 माइक्रो कंटेनमेंट जोन, लेकिन लोगों को पता ही नहीं
शहर में कोरोना संक्रमण अंकुश में लाने के लिए मनपा ने कई प्रयोग किए गए। इनमें से एक माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाना भी है। हालांकि माइक्रो कंटेनमेंट स्ट्रेटजी फेल हो गई है, क्योंकि कोरोना का संक्रमण रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है।
वर्तमान में शहर में 2176 माइक्रो कंटेनमेंट जोन हैं। इनमें लगभग 350000 लोग हैं। ये माइक्रो कंटेनमेंट जोन कहां-कहां हैं आम अादमी को इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि मनपा ने ऐसे उपाय ही नहीं किए कि सभी को इनका पता लग पाए। पहले कंटेनमेंट जोन को कोर्डन किया जाता था। प्रशासन निगरानी करता था, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है। मनपा अब सिर्फ शहर के कुछ इलाकों में हाईरिस्क जोन का बैनर लगा रही है।
लोगों की लापरवाही से बढ़ रहा संक्रमण
^अधिकतर लोग मास्क नहीं पहन रहे, इसके कारण कोरोना का संक्रमण फैल रहा है। संक्रमण नहीं रुकने का मुख्य कारण यही है। केस बढ़ रहे हैं। ऐसा ही रहा तो रात में लाॅकडाउन करना पड़ सकता है।
-बंछानिधि पाणी, कमिश्नर, महानगर पालिका
संक्रमण बढ़ने के ये हैं कारण
- माइक्रो कंटेनमेंट जोन में लोगों की बेरोकटोक आवाजाही
- किसी प्रकार की निगरानी नहीं करना
- अधिकतर लोगों का मास्क नहीं पहनना
- सोशल डिस्टेंसिंग का अभाव
- देर रात भी चाय स्टाॅल और स्ट्रीट फूड की लाॅरी चलना
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Source From
RACHNA SAROVAR
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