राज्य सरकार ने जुलाई में एकम कसौटी परीक्षा लेने का निर्देश दिया था। सरकार के आदेश का न तो स्कूलों ने पूरी तरह से पालन किया और न ही छात्रों ने परीक्षा में गंभीरता दिखाई। इसका परिणाम यह रहा है कि एकम कसौटी परीक्षा में सूरत डांग से भी नीचे रहा। सरकार ने स्कूलों को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया है।
शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लेने का निर्देश देते हुए कहा कि अधिक से अधिक छात्रों को एकम कसौटी परीक्षा में शामिल किया जाए। कोरोनाकाल में स्कूल बंद हैं और बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार ने एक बार फिर 9वीं और 12वीं के छात्रों की एकम कसौटी परीक्षा लेने का आदेश जारी किया है। उधर, स्वनिर्भर स्कूल संगठन और सरकारी स्कूल के शिक्षक संघ का कहना है कि अलग-अलग वजह से एकम कसौटी परीक्षा में सूरत पीछे रह गया।
वजह: बच्चों के गांव जाने से परीक्षा पर पड़ा असर
फीस कमेटी के पूर्व सदस्य जगदीश चावड़ा ने बताया कि एकम कसौटी परीक्षा पर ऑनलाइन पढ़ाई का असर पड़ा है। सूरत में भारी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं जो लॉकडाउन में परिवार के साथ अपने गांव चले गए। इससे बच्चों की संख्या कम हो गई। वहीं, शिक्षा समिति के शिक्षक राहुल गंवाने ने बताया कि शिक्षकों को कोविड-19 में लगाया गया था। इससे बच्चों की ठीक से पढ़ाई नहीं हो गई।
स्थिति: सूरत का परिणाम 30 और डांग का 52 %
शिक्षा विभाग ने जुलाई महीने में ली गई एकम कसौटी परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है। सूरत समेत दक्षिण गुजरात एकम कसौटी में बहुत पीछे रह गया। सूरत में एकम कसौटी परीक्षा का परिणाम 30 प्रतिशत और डांग जिले का 52 प्रतिशत रहा। नवसारी, भरूच और वलसाड भी सूरत से आगे निकल गए। वहीं प्रदेशभर में द्वारका जिला सबसे आगे रहा। हालांकि इस रिजल्ट से पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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