कोरोना महामारी का प्रकाेप दुनियाभर में फैला है। कई देशों में महामारी का दूसरा और तीसरा दौर भी शुरू हो चुका है। इस वजह से कई देशों में दोबारा लॉकडाउन कर दिया गया है, इससे सूरत के कपड़ा उद्योग को पर भारी असर दिखाई दे रहा है। कोविड-10 की वजह से मार्च से ही एक्सपोर्ट पूरी तरह से अटक गया है।
कोरोना का संक्रमण कम होने पर जुलाई महीने में धीरे-धीरे एक्सपोर्ट शुरू तो हुआ, पर अभी तक इसमें पहले जैसी गति नहीं आई है। कोरोना की वजह से एक्सपोर्ट 20 प्रतिशत कम हो गया है। हालांकि जिन देशों में लॉकडाउन नहीं है, कोरोना का असर कम है वहां एक्सपोर्ट हो रहा है। बता दें दिवाली नजदीक होने पर सूरत में कपड़े का कारोबार 40 से 50 फीसदी तक पहुंच गया है।
कुल उत्पादन का 7-8% कपड़ा दूसरे देशों में जाता है
फिआस्वी के अध्यक्ष भरत गांधी और फोस्टा के सेक्रेटरी चंपालाल बोथरा ने बताया कि सूरत में इन दिनों डेढ़ से पौने दो लाख मीटर कपड़े का उत्पादन हो रहा है। इसमें से 8 फीसदी यानी कि 12 लाख मीटर कपड़ा रोजाना एक्सपोर्ट होता है। लॉकडाउन के सेकंड स्पेस के कारण कई देशों में एक्सपोर्ट नहीं हो रहा है। इससे 20 फीसदी यानी कि करीबन ढाई लाख मीटर कपड़ा एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा है।
कई व्यापारियों ने तो मंडी ही बदल ली
सूरत के कपड़ा व्यापारी डायरेक्ट एक्सपोर्ट बहुत कम करते हैं। सूरत का कपड़ा मुंबई से एक्सपोर्ट होता है। कुछ व्यापारी सूरत से कपड़ा खरीदकर एक्सपोर्ट करते हैं। कोरोना में एक्सपोर्ट कम होने पर कई व्यापारियों ने मंडी ही बदल दी है, अब सूरत की बजाय लोकल मंडी से कारोबार कर रहे हैं।
रोजाना 12 लाख मीटर कपड़ा एक्सपोर्ट होता है
दुबई, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, लंदन, यूरोपीय और अमेरिका समेत कई देशों में सूरत से कपड़ा जाता है। सूरत से रोजाना करीबन 12 लाख मीटर कपड़ा एक्सपोर्ट होता है। दुनियाभर में कोरोना महामारी फैलने और लाॅकडाउन की वजह से कपड़े का एक्सपोर्ट घट गया है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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